नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खुदरा बाजार में चीनी की कीमत अब कई जगहों पर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसे अब तक के ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है।
एक महीने पहले जहां चीनी करीब 48.18 रुपये प्रति किलो उपलब्ध थी, वहीं अब इसकी कीमत में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि देश में गन्ने का उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद चीनी महंगी हो रही है। घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से चीनी के निर्यात पर भी रोक लगाई गई है, इसके बावजूद कीमतों में तेजी बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी की कीमतों में इस बढ़ोतरी की एक प्रमुख वजह इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का बढ़ता डायवर्जन है। सरकार की इथेनॉल नीति ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके चलते चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा प्रभावित हो रही है।
अलग-अलग राज्यों में चीनी की कीमतों में अंतर भी देखने को मिल रहा है। पंजाब में खुदरा कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं मुंबई और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों में चीनी 58 से 63 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रही है।
आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। इससे मांग में तेजी आने पर खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
बढ़ती कीमतों ने सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर इथेनॉल उत्पादन के जरिए ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रण में रखना भी आवश्यक है।
जानकारों का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन और खाद्य महंगाई के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यदि गन्ने का इस्तेमाल लगातार बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन में होता रहा तो त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।