रुड़की/देहरादून। उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के सभी विश्वविद्यालय अब एनईपी-2020 के प्रावधानों को धरातल पर उतारने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप तैयार करेंगे। उच्च शिक्षा को रोजगारपरक, तकनीकी रूप से सक्षम और नवाचार आधारित बनाने के साथ उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों में बदलाव पर भी जोर दिया जाएगा।
आईआईटी रुड़की में आयोजित ‘उत्तराखंड एनईपी कॉन्क्लेव-2026’ में विद्यालयी शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि नई शिक्षा नीति के शत-प्रतिशत प्रावधानों को लागू करने के लिए विश्वविद्यालयों को संस्थागत स्तर पर ठोस कार्ययोजना बनानी होगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है।
डॉ. रावत ने विश्वविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, इनोवेशन सेंटर, स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के उद्योगों के साथ विश्वविद्यालय एमओयू करें, ताकि विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, इंडस्ट्री विजिट, प्रोजेक्ट वर्क और प्रशिक्षण के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। उद्योगों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रमों को लगातार अपडेट करने की आवश्यकता भी उन्होंने बताई।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा और शोध का फोकस स्थानीय जरूरतों से जुड़ा होना चाहिए। पर्यटन, कृषि, बागवानी, आयुष, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, हिमालयी पारिस्थितिकी और स्थानीय उत्पादों से संबंधित शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में विश्वविद्यालयों को काम करना होगा। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और युवाओं को सीधे लाभ मिल सकेगा।
मंत्री ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की राज्य स्तरीय रैंकिंग शुरू करने, शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर पदों को भरने, पूर्व छात्रों का डाटा तैयार करने और छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए। साथ ही पेपर लीक की घटनाओं पर रोक, विद्यार्थियों के डाटा की सुरक्षा और छात्रों से निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया।
कॉन्क्लेव में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और अधिकारियों ने उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिए। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीएस रावत ने एनईपी-2020 के क्रियान्वयन और चुनौतियों पर विचार रखे। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने मेंटरिंग, क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। सचिव उच्च शिक्षा बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने वर्ष 2028 तक एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभाग का रोडमैप और एजेंडा प्रस्तुत किया।
कॉन्क्लेव में दून विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय, ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, एसजीआरआर विश्वविद्यालय, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय, एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय और जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने भी शिक्षा, शोध, डिजिटल प्लेटफॉर्म, इन्क्यूबेशन सेंटर, कौशल आधारित शिक्षा और भविष्य की कार्यबल जरूरतों पर प्रस्तुतिकरण दिए।
आईआईएम लखनऊ के एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर की ओर से उत्तराखंड में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने और नए स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर भी प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन आईआईटी रुड़की के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एनके नवानी ने किया।