देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि शिक्षा, विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का बेहतर समन्वय भविष्य के भारत की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा देश की मजबूत नींव है, विज्ञान नई खोज और समझ की शक्ति देता है, जबकि एआई ज्ञान और प्रतिभा को नई गति प्रदान करने वाला माध्यम बन रहा है।
राज्यपाल शनिवार को लोक भवन, देहरादून में आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव एवं गढ़वाल पोस्ट अवॉर्ड्स समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गढ़वाल पोस्ट के 30 वर्ष पूरे होने पर संपादक सतीश शर्मा और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तीन दशकों की अपनी यात्रा में गढ़वाल पोस्ट ने उत्तराखंड के निर्माण, उपलब्धियों, चुनौतियों और आम लोगों की आकांक्षाओं को अपनी पत्रकारिता में प्रमुखता से स्थान दिया है।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने सामाजिक सेवा, कला, साहित्य, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री पद्मभूषण भगत सिंह कोश्यारी समेत कुल 30 लोगों को सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया जनसंवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। डिजिटल दौर और एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारिता की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि तकनीक और माध्यम भले बदलते रहें, लेकिन पत्रकारिता के मूल सिद्धांत—सत्य, तथ्य, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी—हमेशा कायम रहने चाहिए।
उन्होंने एआई की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके माध्यम से देश के दूरदराज क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और विशेषज्ञों का ज्ञान पहुंचाया जा सकता है। इससे पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों के लोगों को भी आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।
राज्यपाल ने युवाओं से एआई को केवल एक तकनीक के रूप में इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को एआई का उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि निर्माता, शोधकर्ता और नवाचारक बनना चाहिए। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है।