देहरादून, रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की तैयार की गई हैंडमेड राखियों की मांग बढ़ गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। इन महिलाओं की मेहनत अब स्थानीय बाजार से निकलकर बड़े बाजारों तक पहुंच रही है।
मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू की जोड़ी इस पहल की खास मिसाल बनकर सामने आई है। अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला रावत के साथ स्वरोजगार शुरू किया। दोनों ने मालदेवता में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की। पिछले साल उन्होंने करीब 1,200 राखियां तैयार कर बिक्री की, जिससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ।
आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत वर्ष 2016 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि मिशन के माध्यम से उन्हें विभिन्न योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ मिला, जिससे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। अब उनके साथ परिवार की नई पीढ़ी भी स्वरोजगार से जुड़ रही है।
महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे, रिबन और अन्य सामग्रियों से पारंपरिक के साथ आधुनिक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इनकी मांग स्थानीय बाजार के अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बढ़ी है और महिलाओं को बाहर से भी ऑर्डर मिल रहे हैं।
रायपुर के साथ सहसपुर और डोईवाला की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियों का निर्माण कर रही हैं। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन को देखते हुए महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर देने के प्रयास जारी हैं।
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी ग्रामीण महिलाओं की तैयार राखियों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। 24 से 27 अगस्त तक सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके अलावा दून के प्रमुख मॉलों में भी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के स्टॉल लगाए जाने की तैयारी है।
