लखनऊ/देहरादून। उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रकवि एवं पद्मभूषण मैथिलीशरण गुप्त की साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के आग्रह पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी के चिरगांव स्थित मैथिलीशरण गुप्त के पैतृक आवास को संग्रहालय के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार की ओर से 4 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
डॉ. निशंक ने लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राष्ट्रनिर्माण, भारतीय संस्कृति, साहित्य के संरक्षण और संवर्धन समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बातचीत में देहरादून के थानो स्थित ‘लेखक गाँव’ और वहां प्रस्तावित हिमालय संग्रहालय की स्थापना का विषय भी प्रमुखता से सामने आया।
भेंट के दौरान डॉ. निशंक ने मुख्यमंत्री के समक्ष चिरगांव, झांसी स्थित मैथिलीशरण गुप्त के पैतृक आवास को ‘राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त संग्रहालय’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पहल को सहर्ष स्वीकार करते हुए इसके लिए 4 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की।
डॉ. निशंक ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने वाला रहा है। उनके पैतृक आवास को संग्रहालय में बदलने से उनकी साहित्यिक स्मृतियों और रचनात्मक विरासत को संरक्षित किया जा सकेगा। साथ ही, यह स्थान आने वाली पीढ़ियों को उनके साहित्य, विचारों और राष्ट्रप्रेम से परिचित कराने का माध्यम बनेगा।
इस दौरान डॉ. निशंक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देहरादून के थानो स्थित भारत के पहले ‘लेखक गाँव’ में आयोजित होने वाले ‘लेखक गाँव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव-2026’ में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए लेखक गाँव आने का आश्वासन दिया।
डॉ. निशंक ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की स्मृतियों और साहित्यिक धरोहर के संरक्षण के लिए सहयोग देने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। सरकार के इस फैसले को हिंदी साहित्य की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।