मुंबई, महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने कथित 100 करोड़ रुपये की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देशमुख के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। राज्यपाल की मंजूरी से मामले में ट्रायल आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से मंगलवार को राज्यपाल की मंजूरी से संबंधित पत्र विशेष अदालत में पेश किया गया। सरकारी वकील सुनील गोंसाल्वेस ने बताया कि राज्यपाल ने 21 मई 2026 को देशमुख के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। अब इस पत्र को अदालत में पेश किए जाने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
यह मामला वर्ष 2021 का है। उस समय अनिल देशमुख महाराष्ट्र के गृह मंत्री थे। तत्कालीन मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने उन पर पद के दुरुपयोग और पुलिस अधिकारियों के जरिए कथित तौर पर मुंबई के बार एवं रेस्तरां से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली कराने का आरोप लगाया था। आरोपों के मुताबिक, तत्कालीन पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और अन्य अधिकारियों को इस कथित वसूली के लिए निर्देश दिए गए थे।
इन आरोपों के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय ने अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू की। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने अनिल देशमुख को गिरफ्तार किया था और उन्हें लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब उनके मंत्री पद पर रहते हुए कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की अदालत में नियमित सुनवाई का रास्ता खुल गया है।
वहीं, अनिल देशमुख ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्यपाल से मुकदमे की मंजूरी मिलना अपेक्षित था। उन्होंने दावा किया कि उन पर लगाए गए वसूली के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। देशमुख ने एंटीलिया मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उनके खिलाफ साजिश रची गई और वह कानूनी लड़ाई का सामना करने के लिए तैयार हैं।