जहाज निर्माण को मिलेगा बड़ा बूस्ट, केंद्र ने खोला 25 हजार करोड़ का समुद्री कोष

नई दिल्ली, भारत को जहाज निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने और घरेलू शिपयार्डों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। सरकार ने भारतीय शिपयार्डों को वित्तीय सहायता देने के लिए 24,736 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (एसबीएफएएस) लागू की है। इसके साथ ही जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए 25,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (एमडीएफ) स्थापित किया गया है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसबीएफएएस का उद्देश्य भारतीय शिपयार्डों के सामने मौजूद लागत संबंधी चुनौतियों को कम करना और उन्हें वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। योजना के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश 26 दिसंबर 2025 को जारी किए जा चुके हैं।

मंत्री के अनुसार, 25,000 करोड़ रुपये के समुद्री विकास कोष में 20,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड (एमआईएफ) और 5,000 करोड़ रुपये का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड (आईआईएफ) शामिल है। एमआईएफ में केंद्र सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में इक्विटी निवेश को बढ़ावा देना है। वहीं आईआईएफ के जरिए शिपयार्डों को मिलने वाले कर्ज की प्रभावी लागत कम करने में मदद मिलेगी।

एमडीएफ के दिशा-निर्देश 20 फरवरी 2026 को जारी किए गए थे। इसके बाद 26 मई 2026 को एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड को एमआईएफ का फंड मैनेजर नियुक्त किया गया।

सरकार ने योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और निगरानी के लिए नेशनल शिपबिल्डिंग मिशन (एनएसबीएम) का गठन भी किया है। यह अंतर-मंत्रालयी निकाय विभिन्न जहाज निर्माण योजनाओं की प्रगति पर नजर रखेगा।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने के प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। मौजूदा शिपयार्डों की क्षमता बढ़ाने के लिए तीन ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली है।

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