वरिष्ठ वामपंथी नेता, शिक्षक आंदोलन के अग्रणी चेहरा और मजदूर-किसान हितों के प्रखर समर्थक कॉमरेड निशान सिंह को रविवार को हजारों लोगों ने नम आंखों और क्रांतिकारी नारों के बीच अंतिम विदाई दी। उनकी अंतिम यात्रा रुद्रपुर स्थित आवास से शुरू होकर श्मशान घाट पहुंची, जहां पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम यात्रा की शुरुआत से पहले आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के राज्य सचिव कॉमरेड इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि कॉमरेड निशान सिंह का निधन तराई क्षेत्र के जन आंदोलनों के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि युवा अवस्था से ही निशान सिंह ने किसानों, मजदूरों और शोषित वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता चुना और जीवनभर सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ते रहे।
उन्होंने बताया कि सरकारी शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए निशान सिंह ने अविभाजित उत्तर प्रदेश में शिक्षक आंदोलन को नई दिशा दी और बाद में उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई और मजदूर संगठन ऐक्टू (AICCTU) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में श्रमिक हितों के लिए सक्रिय रहे। वे मजदूरों और किसानों को राजनीतिक रूप से जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे।
श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता बहादुर सिंह जंगी ने क्रांतिकारी विदाई गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद कॉमरेड निशान सिंह के पार्थिव शरीर पर कम्युनिस्ट पार्टी का लाल झंडा ओढ़ाया गया और परिजनों, सहयोगियों तथा समर्थकों ने पुष्पांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा के दौरान “कॉमरेड निशान सिंह अमर रहें” और “लाल सलाम” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
अंतिम विदाई में उनके परिजन, भाकपा (माले), ऐक्टू, किसान संगठनों, शिक्षक संगठनों, बार एसोसिएशन, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। सभी ने उन्हें संघर्ष, सादगी और जनसेवा के प्रतीक के रूप में याद किया।