वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फ्रांस ने एक महत्वपूर्ण सैन्य कदम उठाया है। फ्रांस ने इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर बारूदी सुरंगों का पता लगाने और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपना माइन काउंटरमेजर (माइन स्वीपर) जहाज तैनात किया है। इस फैसले को क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस तैनाती की जानकारी साझा करते हुए कहा कि फ्रांसीसी माइन स्वीपर जहाज अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन बहाल करने और समुद्री यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में अहम कदम बताया।
यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब हाल के महीनों में इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते के बाद इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बढ़ने का भी उल्लेख किया। बढ़ते समुद्री ट्रैफिक को देखते हुए फ्रांस ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था को जरूरी बताया है।
हालांकि, फ्रांस का यह कदम ईरान को पसंद नहीं आया है। ईरान पहले ही फ्रांस के प्रस्तावित सुरक्षा अभियान में शामिल होने के विचार को खारिज कर चुका है। ईरान का स्पष्ट रुख है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल खाड़ी क्षेत्र के देशों के पास होनी चाहिए और किसी भी पश्चिमी सैन्य मौजूदगी की आवश्यकता नहीं है। ईरान ओमान के साथ मिलकर इस जलडमरूमध्य के प्रबंधन की वकालत करता रहा है।
गौरतलब है कि दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। हालिया अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे कई खाड़ी देशों के ऊर्जा निर्यात पर असर पड़ा। ऐसे में फ्रांस की नई तैनाती को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, ईरान के विरोध के कारण इस क्षेत्र में तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।