नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने उन्नत चिकित्सा तकनीकों को सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ड्रग्स रूल्स, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब सेल या स्टेम सेल आधारित उत्पाद, जीन थेरेपी उत्पाद और ज़ेनोग्राफ्ट (पशु ऊतकों से बने प्रत्यारोपण योग्य उत्पाद) को केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (सीएलएए) के दायरे में शामिल किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य पूरे देश में इन आधुनिक उपचारों के लिए एक समान, पारदर्शी और सख्त नियामक व्यवस्था लागू करना है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि सेल और जीन थेरेपी जैसी आधुनिक चिकित्सा तकनीकें बेहद जटिल, विशेषीकृत और तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्र हैं। ऐसे उपचारों के सुरक्षित उपयोग और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नियामक निगरानी आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नियमों में यह संशोधन किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही चिकित्सा अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे नई तकनीकों के विकास और उनके नियंत्रित उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध होंगे।
गौरतलब है कि स्टेम सेल आधारित उपचार और सीएआर-टी सेल थेरेपी का उपयोग ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में किया जाता है। वहीं जीन थेरेपी आनुवंशिक बीमारियों और कुछ प्रकार के कैंसर के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभरी है। इसके अलावा ज़ेनोग्राफ्ट तकनीक, जिसमें पशुओं के ऊतकों से तैयार प्रत्यारोपण योग्य उत्पादों का उपयोग किया जाता है, हृदय, हड्डी और अन्य जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सरकार का मानना है कि इन उन्नत उपचारों को केंद्रीय स्तर पर नियामक निगरानी में लाने से उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित होगी। साथ ही देश में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के विकास को भी नई गति मिलेगी, जिससे भविष्य में मरीजों को बेहतर और अधिक भरोसेमंद उपचार उपलब्ध कराए जा सकेंगे।