देहरादून। आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से फोर्टिस अस्पताल, मोहाली के डॉक्टरों ने 61 वर्षीय मरीज का जटिल और चुनौतीपूर्ण उपचार सफलतापूर्वक किया है। मरीज एक साथ कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी एक किडनी पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी थी, जबकि दूसरी किडनी में ट्यूमर था। इसके अलावा प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के कारण उन्हें बार-बार और रुक-रुक कर पेशाब आने की गंभीर समस्या भी थी।
फोर्टिस अस्पताल के यूरोलॉजी, एंड्रोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. रोहित डडवाल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने अत्याधुनिक रोबोट-असिस्टेड पार्शियल नेफ्रेक्टोमी और वॉटर वेपर थेरेपी (रेजुम) के जरिए मरीज का सफल इलाज किया। इस प्रक्रिया में ट्यूमर से प्रभावित किडनी के हिस्से को हटाया गया, जबकि स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा गया, जिससे मरीज की बची हुई किडनी का कार्य सामान्य रूप से जारी रह सके।
डॉक्टरों के अनुसार, मरीज को बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) यानी प्रोस्टेट ग्रंथि के गैर-कैंसरकारी बढ़ाव की समस्या भी थी। इसके कारण उन्हें पेशाब करने में काफी कठिनाई हो रही थी। इस समस्या का उपचार अत्याधुनिक वॉटर वेपर थेरेपी (रेजुम) से किया गया, जिसमें जलवाष्प की मदद से बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि को सिकोड़कर मूत्र मार्ग की रुकावट दूर की जाती है। यह एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिससे मरीज को कम दर्द और तेजी से रिकवरी का लाभ मिलता है।
मरीज ने लगातार पेशाब संबंधी परेशानी और अस्वस्थता महसूस होने पर फोर्टिस अस्पताल में परामर्श लिया था। विस्तृत जांच में पता चला कि उनकी दायीं किडनी पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है और बायीं किडनी में ट्यूमर विकसित हो गया है। ऐसे में डॉक्टरों के सामने मरीज की कार्यरत किडनी को बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी।
सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति तेजी से सुधरी और उन्हें तीसरे दिन ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अंतिम पैथोलॉजी रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि किडनी का ट्यूमर पूरी तरह निकाल दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोटिक सर्जरी और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जटिल यूरोलॉजिकल बीमारियों का उपचार अब अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो गया है।