जबलपुर के रांझी और गोकलपुर क्षेत्र इन दिनों भीषण पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि लाखों लोगों को पूरे दिन में केवल 5 से 10 मिनट के लिए पानी की आपूर्ति हो रही है। इतनी कम अवधि की सप्लाई के कारण कई परिवार एक-दो बाल्टी पानी भी नहीं भर पा रहे हैं, जिससे पीने के पानी के साथ-साथ दैनिक उपयोग की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति जिस परियट जलाशय पर निर्भर है, उसकी स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। जलाशय का अधिकांश हिस्सा गाद से भर गया है और उपयोग योग्य पानी बहुत कम बचा है। लोगों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में भले ही जलस्तर 5 से 6 फीट बताया जा रहा हो, लेकिन वास्तविक स्थिति में 4 से 5 फीट तक सिल्ट जमा है, जिसके कारण पानी का भंडारण प्रभावित हुआ है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हर वर्ष की तरह 15 मई को उमरिया नहर को बंद कर दिया गया। इसके बाद रांझी और गोकलपुर की पूरी जलापूर्ति परियट जलाशय पर निर्भर हो गई। समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने से अब लाखों नागरिक जल संकट की मार झेलने को मजबूर हैं।
पानी की कमी का असर लोगों की दिनचर्या पर साफ दिखाई दे रहा है। सुबह से ही लोग नलों के पास पानी आने का इंतजार करते हैं, लेकिन सप्लाई शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में बंद हो जाती है। कई मोहल्लों में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
जल संकट को लेकर लोगों का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। पूर्व पार्षद राजेश यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और महापौर कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित इलाकों में पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकर भेजने और जल टंकियों को पूरी क्षमता तक भरने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री कमलेश श्रीवास्तव ने स्वीकार किया कि खंदारी, परियट और बरगी जलाशयों का जलस्तर घटा है। उन्होंने बताया कि परियट जलाशय से सिल्ट हटाने का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा और जलाशय के पिछले हिस्से में अभी कुछ पानी उपलब्ध है।