नैनीताल। उत्तराखंड के राज्यपाल Gurmit Singh ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत संचालित Indian Veterinary Research Institute, मुक्तेश्वर में आयोजित कार्यक्रम में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी उपलब्धियों का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना होना चाहिए। विज्ञान तभी सार्थक माना जाएगा जब उसका सीधा लाभ किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण समुदायों को मिले।
राज्यपाल ने कहा कि आईवीआरआई, मुक्तेश्वर केवल एक अनुसंधान संस्थान नहीं, बल्कि विज्ञान, सेवा और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा और पशुधन विकास के क्षेत्र में संस्थान के योगदान की सराहना की।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुधन की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है और यह विशेष रूप से महिलाओं की आजीविका का प्रमुख आधार है। उन्होंने वैज्ञानिकों से ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को और प्रभावी बनाने का आग्रह किया, ताकि अनुसंधान का लाभ दूरदराज के गांवों और सीमांत पशुपालकों तक पहुंच सके।
राज्यपाल ने विज्ञान आधारित डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही आईवीआरआई से युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की भी अपील की।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘वन हेल्थ’ अवधारणा को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, इसलिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं। राज्यपाल ने स्वदेशी पशु नस्लों, विशेषकर बद्री गाय के संरक्षण, प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन और एआई व डिजिटल तकनीकों के माध्यम से पशुपालकों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्राकृतिक कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण किया तथा आगामी वर्षों में 100 मॉडल पशुपालक गांव विकसित करने का आह्वान भी किया।