देहरादून पुल धंसाव की जांच में बड़ा खुलासा, डिजाइन में ही रह गई थी सुरक्षा की कमी

 देहरादून। नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले में विभागीय जांच पूरी हो गई है। क्षेत्रीय मुख्य अभियंता की ओर से तैयार विस्तृत जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद पुल निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, विभागीय जांच में पुल की सुरक्षा से जुड़े डिजाइन में कथित खामियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि आईआईटी और तकनीकी सलाहकारों की ओर से तैयार डिजाइन में सुरक्षा के लिए आवश्यक कुछ इंतजामों का पर्याप्त प्रावधान नहीं किया गया था। हालांकि, रिपोर्ट के आधिकारिक रूप से सार्वजनिक होने के बाद ही जांच में सामने आए निष्कर्षों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में हुई अतिवृष्टि के कारण टौंस नदी पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद पुल की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम कराया गया। करीब कई महीनों की कवायद के बाद जुलाई 2026 में पुल को दोबारा यातायात के लिए खोला गया।

पुल खुलने के कुछ ही दिनों बाद उसकी एप्रोच रोड के धंसने की घटना सामने आई। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी डिजाइन पर सवाल उठने लगे। एप्रोच रोड धंसने के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए।

मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद क्षेत्रीय मुख्य अभियंता के स्तर पर विभागीय जांच कराई गई। जांच के दौरान निर्माण कार्य, तकनीकी डिजाइन, सुरक्षा उपायों और एप्रोच रोड की स्थिति से जुड़े विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया गया।

अब जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपे जाने के बाद संबंधित अधिकारियों और तकनीकी सलाहकारों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधिकारिक परीक्षण और सक्षम स्तर से कार्रवाई तय होने के बाद ही सामने आएगा। पुल की सुरक्षा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तकनीकी मानकों की समीक्षा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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