नई दिल्ली। देशभर में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ केमिस्ट और दवा विक्रेता संगठनों ने बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। बुधवार को आयोजित इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते करीब 12.4 लाख निजी मेडिकल स्टोर बंद रहने की आशंका जताई गई है। इससे दवाओं की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और मरीजों को जरूरी दवाएं मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दवा विक्रेताओं के प्रमुख संगठनों का आरोप है कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी और नियमों के पालन के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां अक्सर डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन की सही तरीके से जांच नहीं करतीं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।
फार्मासिस्टों ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन दवाओं की अनियंत्रित बिक्री से नकली दवाओं का कारोबार बढ़ सकता है। साथ ही डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली संवेदनशील दवाओं और नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। दवा विक्रेताओं के अनुसार बिना उचित सत्यापन के अनुसूची एच (शेड्यूल एच) जैसी दवाओं की बिक्री युवाओं में नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है।
पारंपरिक मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सख्त नियमों का पालन करते हैं। हर पर्चे की जांच और सीमित मात्रा में दवा वितरण अनिवार्य होता है, जबकि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर इन नियमों की अनदेखी की जा रही है।
इसके अलावा, जीवन रक्षक दवाओं को निर्धारित तापमान में सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन डिलीवरी के दौरान कोल्ड चेन नियमों का सही पालन नहीं किया जाता, जिससे दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इस हड़ताल के बीच राहत की बात यह है कि Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana के तहत संचालित जनऔषधि केंद्र खुले रहेंगे, ताकि आम लोगों को जरूरी दवाएं उपलब्ध होती रहें। इस आंदोलन ने ऑनलाइन और ऑफलाइन फार्मेसी कारोबार के बीच बढ़ते विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया है।