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रेरा पोर्टल से जुड़ेगा नक्शा पास सिस्टम, क्या अब रुकेगा अवैध निर्माण?

देहरादून। राज्य में निर्माण कार्यों को पारदर्शी, सुव्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। गुरुवार को सचिवालय में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को उत्तराखण्ड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) के पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इस कदम से नक्शा पास कराने की प्रक्रिया ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी हो सकेगी।

बैठक में यह भी तय हुआ कि नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं को भी इस पोर्टल के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए मानचित्र स्वीकृति देने वाले सभी प्राधिकरणों को पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रक्रियाओं में देरी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। विभिन्न विभागों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए और इस व्यवस्था को जल्द लागू करने पर सहमति जताई।

बैठक के दौरान भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बढ़ोतरी के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में आवासीय या पर्यटन उपयोग के लिए सर्किल रेट के बराबर शुल्क और व्यावसायिक उपयोग के लिए 1.5 गुना शुल्क लिया जा रहा है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। इस पर सरकार ने पुनर्विचार के संकेत दिए हैं।

एक अहम निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया गया कि अधिसूचित क्षेत्रों में अब पंचायतों को नक्शा पास करने का अधिकार नहीं रहेगा। संशोधित अधिनियम के तहत यह अधिकार केवल विकास प्राधिकरणों को दिया गया है। इससे निर्माण कार्यों में एकरूपता और निगरानी बेहतर होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, अवैध कॉलोनियों और अनियोजित विकास पर रोक लगाने के लिए रेरा के माध्यम से सख्त निगरानी की जाएगी। जहां कहीं भी बिना अनुमति भूखंडों का विभाजन या कॉलोनी विकसित की जा रही होगी, वहां कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अवैध निर्माण पर लगाम कसने के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे सभी प्राधिकरणों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार हो सके। सरकार का यह कदम राज्य में निर्माण गतिविधियों को व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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