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चारधाम यात्रा में बढ़ी सख्ती—नदी किनारों पर क्यों लगाए गए प्रतिबंध? जानें वजह

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कोटद्वार। चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए जनपद पुलिस ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। यात्रा मार्गों, प्रमुख पड़ाव स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके।

अपर पुलिस अधीक्षक मनोज ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि विशेष रूप से नदी तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रीनगर गोवा बीच और देवप्रयाग संगम जैसे स्थानों पर जलस्तर, तेज धारा और फिसलन के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने खतरनाक और प्रतिबंधित स्थानों को चिन्हित कर वहां बैरिकेडिंग कर दी है और चेतावनी संकेतक भी लगाए गए हैं।

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इन संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल द्वारा लगातार गश्त की जा रही है। श्रद्धालुओं को इन खतरनाक स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है और केवल सुरक्षित एवं निर्धारित स्थानों पर ही स्नान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य है कि कोई भी श्रद्धालु अनजाने में जोखिम न उठाए और यात्रा के दौरान सुरक्षित रहे।

इसके साथ ही, जल पुलिस और आपदा राहत टीमों की भी तैनाती की गई है। ये टीमें आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य करने के लिए तैयार रहती हैं।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें। चारधाम यात्रा आस्था का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि हर श्रद्धालु अपनी यात्रा को सुखद और सुरक्षित बना सके।

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