अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले उठे बड़े सवाल, क्या पाकिस्तान बन रहा है नया कूटनीतिक केंद्र?

नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच शनिवार से शुरू हो रही अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस कूटनीतिक पहल से जहां शांति की उम्मीदें जगी हैं, वहीं भारत की विदेश नीति और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह बैठक इस्लामाबाद में हो रही है और पूरी दुनिया को इससे सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इज़रायल की आक्रामक नीतियां इस प्रक्रिया को प्रभावित न कर दें।

जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान को इस तरह की अहम कूटनीतिक भूमिका कैसे मिल गई। उन्होंने यह भी कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता पाई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की कूटनीतिक रणनीतियों, जैसे “नमस्ते ट्रंप” और “हाउडी मोदी”, के बावजूद भारत अमेरिका को पाकिस्तान को नई भूमिका देने से नहीं रोक पाया। साथ ही उन्होंने व्यापार समझौतों और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा कि ब्रिक्स प्लस के अध्यक्ष होने के बावजूद भारत ने शांति और मध्यस्थता के लिए कोई ठोस पहल क्यों नहीं की, खासकर तब जब ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देश इसमें शामिल हैं।

चीन को लेकर भी उन्होंने सरकार की नीति की आलोचना की और कहा कि पिछले डेढ़ साल में अपनाई गई रणनीति से भारत को क्या लाभ मिला, यह स्पष्ट नहीं है।

अमेरिका-ईरान वार्ता और क्षेत्रीय राजनीति के इस बदलते परिदृश्य के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर बहस और तेज हो गई है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.