नई दिल्ली। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच वाहन निर्माताओं के संगठन सायम (SIAM) ने सरकार के प्रस्तावित बैटरी रीसाइक्लिंग नियमों को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि यदि प्रस्तावित लक्ष्य मौजूदा स्वरूप में लागू किए गए, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 3 से 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे ईवी बाजार की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका है।
सायम ने अपनी आपत्तियां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के समक्ष रखी हैं। संगठन ने पिछले वर्ष नवंबर में सीपीसीबी को पत्र भेजने के अलावा हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ हुई बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उद्योग जगत का मानना है कि सख्त रीसाइक्लिंग नियमों से वाहन निर्माताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
सायम के अनुसार, 35 से 40 किलोवॉट घंटे क्षमता वाली एक औसत इलेक्ट्रिक कार बैटरी की लागत में 8,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। इसके अतिरिक्त बैटरियों के संग्रह, सुरक्षित भंडारण और परिवहन से जुड़े खर्च भी कंपनियों को वहन करने पड़ेंगे, जिससे कुल उत्पादन लागत और बढ़ जाएगी।
बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत वाहन निर्माताओं को आठ वर्षों के उपयोग के बाद 70 प्रतिशत बैटरियां एकत्र करनी होंगी। बाद के वर्षों में यह लक्ष्य बढ़ाकर 82 प्रतिशत तक किया जा सकता है। हालांकि, उद्योग का कहना है कि वर्तमान में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जा रही लीथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरियों की आयु अपेक्षाकृत लंबी होती है, ऐसे में निर्धारित लक्ष्य व्यवहारिक चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।
सायम ने सीपीसीबी से आग्रह किया है कि नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए। संगठन का तर्क है कि धातु-विशिष्ट रिकवरी लक्ष्य रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के दौरान होने वाले नुकसान और बैटरियों के विभिन्न प्रकारों को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखते। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और ईवी उद्योग के विकास के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी, ताकि स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के साथ उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।