देहरादून। जिले में दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कलेक्ट्रेट में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक लेते हुए वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को कई गुना बढ़ाने के लिए माइक्रोप्लानिंग के तहत क्लस्टर विकसित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीस्टैक के माध्यम से किसानों और उनकी कृषि भूमि से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप से व्यवस्थित किया जाएगा। इससे कृषि सेवाओं को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को किसानों को उन्नत बीज, बीज उत्पादन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में अरहर, उड़द और मसूर के उत्पादन एवं खेती के रकबे को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने इंटर-क्रॉपिंग को बढ़ावा देने के साथ बंजर और खाली पड़ी कृषि भूमि का उपयोग दलहन उत्पादन के लिए करने को कहा। उन्होंने किसानों को गन्ने की कतारों के बीच खाली स्थान में दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि धान और गेहूं के पारंपरिक फसल चक्र के बीच दलहन को शामिल करने से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और बेहतर आय का अवसर मिल सकता है।
मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र राणा ने वर्तमान उत्पादन और वर्ष 2030-31 के निर्धारित लक्ष्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उड़द की खेती 470 हेक्टेयर में हो रही है और इससे 274 मीट्रिक टन उत्पादन मिल रहा है। लक्ष्य के तहत इसका रकबा बढ़ाकर 754 हेक्टेयर और उत्पादन 765 मीट्रिक टन करने की योजना है।
अरहर का वर्तमान रकबा 286 हेक्टेयर और उत्पादन 367 मीट्रिक टन है। इसे बढ़ाकर 457 हेक्टेयर तथा 686 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। वहीं मसूर का रकबा 242 हेक्टेयर और उत्पादन 146 मीट्रिक टन है। इसे बढ़ाकर 427 हेक्टेयर और 453 मीट्रिक टन उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी स्मृता परमार, मुख्य उद्यान अधिकारी डीके तिवारी समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।