नई दिल्ली। देश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं और विभिन्न राज्यों में बड़े नेताओं की रैलियों का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कूचबिहार से पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव अभियान का औपचारिक आगाज़ करेंगे।
बताया जा रहा है कि इस रैली में पीएम मोदी ‘विकसित बंगाल’ का विजन पेश करेंगे और राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोल सकते हैं। वे खासतौर पर शासन व्यवस्था, कानून-व्यवस्था की स्थिति और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकते हैं।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद यह पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री की पहली चुनावी रैली होगी। इससे पहले वे 14 मार्च को राज्य के दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने कोलकाता में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने करीब 18,680 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया था।
इधर दक्षिण भारत में भी राजनीतिक माहौल गर्माता नजर आ रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक चुनावी रैली के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पर निशाना साधते हुए खुली चुनौती दी है।
स्टालिन ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान में साहस है, तो वे तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान तीन-भाषा नीति लागू करने की घोषणा करें।
उनका यह बयान भाषा नीति को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है, जो पहले से ही तमिलनाडु की राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है।
स्पष्ट है कि एक ओर जहां पश्चिम बंगाल में बीजेपी अपने चुनाव अभियान को धार दे रही है, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु में भाषा और पहचान की राजनीति भी जोर पकड़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में दोनों राज्यों में चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है।
