कलियुग में मुक्ति का सबसे आसान मार्ग क्या है? भागवत कथा में आचार्य कीर्ति बल्लभ ने बताया रहस्य

लालकुआं। बिंदुखत्ता के टैंट चौराहे पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर पौड़ी गढ़वाल से पधारे आचार्य श्री कीर्ति बल्लभ जी महाराज ने कलियुग की परिस्थितियों और उससे मुक्ति के सरल उपायों पर विस्तार से प्रवचन दिया।

आचार्य जी ने भागवत कथा के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि कलियुग में मनुष्य अनेक प्रकार की परेशानियों, तनाव और मोह-माया में उलझा हुआ है। ऐसे समय में भगवान नारायण का नाम जप और कीर्तन ही सबसे सरल और प्रभावी साधन है, जिससे मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को शुकदेव महाराज द्वारा सुनाई गई कथा में भी कलियुग के दोषों और उनसे बचने के उपायों का उल्लेख मिलता है।

प्रवचन के दौरान आचार्य कीर्ति बल्लभ ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि द्वारिका में भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के आगमन पर स्वयं उनके चरण धोए और उन्हें अपार सम्मान व समृद्धि प्रदान की। यह प्रसंग निस्वार्थ मित्रता, भक्ति और भगवान के भक्तों के प्रति उनके प्रेम का अद्वितीय उदाहरण है।

आचार्य जी ने कहा कि मनुष्य सीमित ज्ञान वाला प्राणी है और उसे यह स्वीकार करना चाहिए कि वह सब कुछ नहीं जान सकता। जीवन में जो ज्ञान और अनुभव प्राप्त हैं, उन्हें पर्याप्त मानकर संतोष और आनंद के साथ जीवन व्यतीत करना ही सच्चा योग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे हरिनाम जप को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, क्योंकि यही कलियुग का सबसे सरल और प्रभावी तारक मंत्र है।

सात दिवसीय कथा के अंतिम चरण में भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालु भजन-कीर्तन में लीन रहे। आयोजकों ने बताया कि कथा के समापन पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

 

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