देहरादून। लगातार और तेज सिरदर्द से जूझ रहे एक मरीज को मणिपाल अस्पताल, देहरादून में दुर्लभ तंत्रिका संबंधी बीमारी का सफल उपचार मिला है। जादवपुर निवासी 47 वर्षीय प्रवीर गुहा पिछले ढाई महीने से गंभीर सिरदर्द की समस्या से परेशान थे, जिससे उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था।
मरीज ने पहले कोलकाता में लगभग 13 चिकित्सकों से परामर्श लिया और कई बार सीटी स्कैन व एमआरआई जांच करवाई, लेकिन सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। शुरुआती चरण में डॉक्टरों ने इसे माइग्रेन समझकर उपचार शुरू किया, परन्तु दवाइयों से कोई राहत नहीं मिली। लगातार बढ़ते दर्द के कारण उनके लिए बैठना, काम करना और दैनिक गतिविधियां करना भी मुश्किल हो गया था।
देहरादून स्थित मणिपाल अस्पताल पहुंचने पर तंत्रिका रोग विभाग के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. जयंता रॉय की टीम ने विस्तृत जांच की। जांच के बाद मरीज को स्पॉन्टेनियस इंट्राक्रैनियल हाइपोटेंशन (एसआईएच) नामक दुर्लभ बीमारी से ग्रसित पाया गया। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब मस्तिष्क और मेरुदंड की सुरक्षा करने वाले सेरेब्रोस्पाइनल द्रव का दबाव मेरुदंड में रिसाव के कारण कम हो जाता है, जिससे तीव्र सिरदर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ([PMC][1])
मरीज के उपचार के लिए डॉक्टरों ने न्यूनतम आक्रामक तकनीक ऑटोलॉगस एपिड्यूरल ब्लड पैच का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में मरीज के ही रक्त की थोड़ी मात्रा को मेरुदंड के उस हिस्से के पास डाला जाता है जहां से द्रव का रिसाव हो रहा होता है। इससे रिसाव बंद हो जाता है और सिरदर्द में तेजी से राहत मिलती है। यह प्रक्रिया डॉ. इंद्रनील घोष द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न की गई। ([sciencedirect.com][2])
इसके साथ ही, मस्तिष्क में जमा रक्त को निकालने के लिए न्यूरोसर्जन डॉ. दीपेंद्र कुमार प्रधान ने शल्यक्रिया की, जिससे मरीज की स्थिति में और सुधार आया। उपचार के बाद प्रवीर गुहा की हालत स्थिर है और अब वे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि सही समय पर सटीक जांच और विशेषज्ञों की टीम वर्क से दुर्लभ और जटिल बीमारियों का भी सफल उपचार संभव है। डॉक्टरों ने लोगों से लगातार सिरदर्द को नजरअंदाज न करने और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी है।