जीवन के सफर में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो समय के साथ और गहरे हो जाते हैं, लेकिन जब वही रिश्ते अचानक बिछड़ने लगें, तो मन को स्वीकार करना कठिन हो जाता है। ऐसा ही दर्द लेखक ने अपने कॉलेज जीवन के दोस्तों को खोने के अनुभव में व्यक्त किया है।
Assam Engineering College (AEC), जालुकबारी के 1985–90 बैच के कई साथियों के असमय निधन की खबर ने सभी को झकझोर कर रख दिया। कुछ ही दिनों के भीतर बीमारी और दुर्घटनाओं के कारण तीन साथियों के चले जाने की सूचना ने पुराने दोस्तों को जोड़ने वाले व्हाट्सएप समूह को शोक संदेशों से भर दिया।
कॉलेज के दिन, जो कभी हंसी-खुशी और सपनों से भरे थे, आज यादों में सिमट गए हैं। गुवाहाटी विश्वविद्यालय के पास स्थित शांत परिसर, हॉस्टल की चहल-पहल और दोस्तों के साथ बिताए पल अब केवल स्मृतियों का हिस्सा हैं।
लेख में कई साथियों का जिक्र किया गया है—ज्योतिप्रकाश कुर्मी, जो किडनी की बीमारी से जूझते हुए दुनिया से विदा हो गए; कमल दास, जिन्होंने दुर्घटना के बाद लंबी पीड़ा सही; और सुज्ञान दत्ता, जिन्होंने अपने अंतिम दिनों में भी मित्रों से हंसी-मजाक बनाए रखा। इनके अलावा कई अन्य साथी भी समय से पहले इस दुनिया को अलविदा कह गए।
लेखक बताते हैं कि कॉलेज के बाद जीवन की राहें अलग-अलग हो गईं, लेकिन दोस्ती का रिश्ता बना रहा। उन्होंने पत्रकारिता को अपना करियर चुना, जिसमें उनके शिक्षकों और मित्रों का अहम योगदान रहा।
यह संपादकीय केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की अनिश्चितता और रिश्तों की अहमियत को भी दर्शाता है। यह हमें याद दिलाता है कि लोग भले ही इस दुनिया से चले जाएं, लेकिन उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहती हैं।