दिव्य कला मेला में राज्यपाल का बड़ा संदेश—दिव्यांगता नहीं, आत्मबल की पहचान

देहरादून। गुरमीत सिंह (लेफ्टिनेंट जनरल, सेवानिवृत्त) ने देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित ‘दिव्य कला मेला’ में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस मेले में देशभर से आए दिव्यांगजनों ने अपने हस्तशिल्प, उत्पादों और कलाकृतियों का आकर्षक प्रदर्शन किया।

राज्यपाल ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर प्रतिभागियों से संवाद किया और उनके नवाचारों की सराहना की। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को रियायती ऋण के चेक भी वितरित किए।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि प्रदर्शित प्रत्येक उत्पाद यह प्रमाणित करता है कि दिव्यांगता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि संकल्प, आत्मबल और रचनात्मकता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग मुख्यधारा से जुड़ा हो। दिव्यांगजन सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और समान भागीदारी के अधिकारी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दिव्यांगजनों के लिए नए अवसर खोल रही है। इससे वे सृजन, नवाचार और उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राज्यपाल ने मेले को ‘लोकल फॉर वोकल’ और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने वाला बताया।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि यह आयोजन मानवीय सामर्थ्य का उत्सव है और दिव्यांग सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘सुगम्य भारत अभियान’, दिव्यांग पेंशन योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में माला राज्य लक्ष्मी शाह सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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