देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारियों से वन एवं प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मानकर काम करने का आह्वान किया। देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सीमा पर सैनिक देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, वहीं वन अधिकारी देश की प्राकृतिक संपदा के प्रहरी हैं।
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने उपराष्ट्रपति का उत्तराखंड में स्वागत करते हुए उनके मार्गदर्शन को युवा अधिकारियों के लिए प्रेरणादायी बताया।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, जल संकट, जैव विविधता में कमी और प्राकृतिक आपदाएं बड़ी चुनौतियां बनकर सामने आई हैं। ऐसे दौर में भारतीय वन सेवा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि जल स्रोतों, जैव विविधता और मानव जीवन के आधार से जुड़े महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं।
उन्होंने वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बेहद जरूरी बताया। राज्यपाल ने कहा कि जिन समुदायों का जंगलों से पीढ़ियों पुराना संबंध रहा है, उनके पारंपरिक ज्ञान और अनुभव को वन प्रबंधन में शामिल किया जाना चाहिए। गैर-इमारती वन उत्पाद, औषधीय पौधे, स्थानीय उत्पाद, इको-टूरिज्म और वन आधारित छोटे उद्योग ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय लोगों को जंगलों से सम्मानजनक रोजगार और विकास के अवसर मिलेंगे, तो वे स्वयं वन संरक्षण के सबसे मजबूत प्रहरी बन सकते हैं।
राज्यपाल ने वन प्रशासन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह तकनीक, रिमोट सेंसिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली वन प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। युवा अधिकारियों से उन्होंने तकनीक अपनाने के साथ नवाचार और नए समाधान तलाशने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों की सोच वैज्ञानिक, निर्णय निष्पक्ष और व्यवहार संवेदनशील होना चाहिए। परिस्थितियां और कार्यक्षेत्र बदल सकते हैं, लेकिन राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा कायम रहनी चाहिए।
कार्यक्रम में आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे।