देहरादून में पशुचिकित्सकों को हाईटेक प्रशिक्षण, अब अल्ट्रासोनोग्राफी से होगा सटीक इलाज

देहरादून। पशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तराखण्ड पशुचिकित्सा परिषद द्वारा आयोजित सतत् पशुचिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का सफल समापन 15 फरवरी 2026 को हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के पशुचिकित्सा अधिकारियों को “पशुओं में अल्ट्रासोनोग्राफी एवं रेडियोलॉजी का व्यवहारिक प्रशिक्षण” प्रदान किया गया।

परिषद के रजिस्ट्रार डॉ. प्रलयंकर नाथ ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य पशुओं में होने वाले रोगों के त्वरित, सटीक और वैज्ञानिक निदान की क्षमता को विकसित करना है। आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के माध्यम से पशु चिकित्सकों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि वे जमीनी स्तर पर बेहतर उपचार सुनिश्चित कर सकें।

प्रशिक्षण सत्र में विषय विशेषज्ञों के रूप में भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान से डॉ. अभिषेक चन्द्र सक्सेना तथा सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से डॉ. अजित कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को आधुनिक अल्ट्रासोनोग्राफी एवं रेडियोलॉजी तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उन्नत तकनीकों के उपयोग से पशुओं में आंतरिक रोगों की शीघ्र पहचान संभव है, जिससे उपचार की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

समापन समारोह में परिषद के अध्यक्ष डॉ. कैलाश उनियाल और रजिस्ट्रार डॉ. प्रलयंकर नाथ ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देंगे और पशुपालकों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. मुकेश कुमार डुम्का एवं डॉ. लतेश जोशी का विशेष योगदान रहा। परिषद ने भविष्य में भी ऐसे तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

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