लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, अब श्रेय की जंग क्यों?

देहरादून।  लालढांग–चिल्लरखाल मोटर मार्ग को सुप्रीम कोर्ट से मिली स्वीकृति के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर इस फैसले से क्षेत्रीय जनता में खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष **गणेश गोदियाल** ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जनसंघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को आगे बढ़ाने में पूर्व मंत्री **डॉ. हरक सिंह रावत** की अहम भूमिका रही है। उनके अनुसार, डॉ. रावत ने केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार पैरवी की, संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया और इस मार्ग को जनहित का मुद्दा बनाकर मजबूती से उठाया।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि जब से कोटद्वार से विधायक **ऋतु खंडूरी** बनीं, तब से यह मामला अनावश्यक विवादों और तकनीकी पेचीदगियों में उलझता चला गया। उन्होंने भाजपा सरकार पर नीतिगत असमंजस और कमजोर पैरवी का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना लंबे समय तक लंबित रही।

कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी स्थानीय जनता के निरंतर संघर्ष और पूर्व मंत्री के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भाजपा पर तैयार योजनाओं का श्रेय लेने की राजनीति करने का आरोप लगाया।

गोदियाल ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस सच्चाई सामने लाना अपना दायित्व समझती है। उनका कहना है कि लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग की स्वीकृति किसी नई उपलब्धि का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मांग और प्रयासों की परिणति है।

अब देखना यह होगा कि इस परियोजना के धरातल पर उतरने के साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की यह जंग किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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