अब रंगीन रत्नों की जांच होगी और ज्यादा भरोसेमंद, IGI–AGL की ऐतिहासिक साझेदारी

देहरादून।
रंगीन रत्नों (कलर्ड जेमस्टोन) के प्रमाणन और ग्रेडिंग के क्षेत्र में एक बड़ा वैश्विक बदलाव देखने को मिला है। इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (इंडिया) लिमिटेड (आईजीआई) ने अमेरिकन जेमोलॉजिकल लेबोरेटरीज (एजीएल) के अधिग्रहण की घोषणा की है। एजीएल को दुनिया भर में रंगीन रत्नों के वैज्ञानिक विश्लेषण और उनके मूल स्रोत की पहचान के लिए अग्रणी संस्था माना जाता है।

इस रणनीतिक अधिग्रहण के साथ अब आईजीआई के वैश्विक नेटवर्क, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार पहुंच का मेल एजीएल की गहरी वैज्ञानिक विशेषज्ञता से हो गया है। दोनों संगठनों के एकजुट होने से रत्न और आभूषण उद्योग में प्रमाणन, पारदर्शिता और भरोसे के स्तर को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है।

आईजीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल सीईओ **तेहमास्प प्रिंटर** ने इसे उद्योग में परिवर्तनकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि रंगीन रत्नों के क्षेत्र में एजीएल की वैज्ञानिक क्षमता को आईजीआई के वैश्विक प्लेटफॉर्म से जोड़कर एक ऐसा सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो बड़े पैमाने पर सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ निष्पक्षता और वैज्ञानिक मानकों से कोई समझौता नहीं करेगा। यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर रत्न प्रमाणन में एकरूपता और विश्वास की नई मिसाल बनेगी।

अधिग्रहण के बाद भी एजीएल की व्यावसायिक स्वतंत्रता बरकरार रहेगी। **क्रिस स्मिथ** पहले की तरह एजीएल के प्रेसिडेंट और चीफ जेमोलॉजिस्ट बने रहेंगे। संगठन का मुख्यालय न्यूयॉर्क में ही रहेगा और फिलहाल कार्यप्रणाली या तकनीकी मानकों में किसी बदलाव की योजना नहीं है।

आईजीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि इस साझेदारी से रंगीन रत्नों से जुड़े शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाएगा। एजीएल के अनुसंधान, वैज्ञानिक ज्ञान और शिक्षण पद्धतियों को आईजीआई के वैश्विक शैक्षणिक ढांचे में शामिल किया जाएगा।

ब्लैकस्टोन के दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण के तहत आईजीआई ने वैश्विक विस्तार, आधुनिक लैब सुविधाओं और प्रतिभा विकास में लगातार निवेश किया है। एजीएल के अधिग्रहण के साथ इस दीर्घकालिक रणनीति को आगे बढ़ाते हुए रंगीन रत्नों के प्रमाणन में वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत किया जाएगा।

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