देश की आर्थिक दिशा तय करने वाले अहम दिन पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शनिवार को अपनी पूरी टीम के साथ संसद भवन पहुंच चुकी हैं। आज 1 फरवरी को वह वित्त वर्ष 2026-27 (अप्रैल 2026 से मार्च 2027) का आम बजट पेश करेंगी। इसके साथ ही वह लगातार नौवां बजट प्रस्तुत कर इतिहास रचने जा रही हैं, जो अब तक किसी भी वित्त मंत्री द्वारा सबसे अधिक बजट पेश करने का रिकॉर्ड होगा।
इस बजट को लेकर देशभर के करदाताओं, मध्यम वर्ग और उद्योग जगत की निगाहें टिकी हुई हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से गुजर रही है और अमेरिका समेत कई देशों द्वारा नए टैरिफ लगाए जा रहे हैं, भारत के लिए यह बजट एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की रणनीति अपनाएगी। बाहरी आर्थिक दबावों का असर घरेलू बाजार पर कम से कम पड़े, इसके लिए सरल लेकिन प्रभावी नीतिगत सुधारों की घोषणा संभव है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को लेकर सरकार का फोकस बरकरार रहेगा। हालांकि, महामारी के बाद जिस तेज रफ्तार से खर्च बढ़ाया गया था, उसकी तुलना में इस बार वृद्धि थोड़ी संतुलित हो सकती है। इसके बावजूद सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
मध्यम वर्ग के लिए यह बजट खास मायने रखता है। बढ़ती महंगाई के बीच लोगों को आयकर स्लैब में बदलाव, स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी या अन्य कर राहतों की उम्मीद है, जिससे उनकी बचत को बढ़ावा मिल सके।
कुल मिलाकर, आज पेश होने वाला यह बजट न केवल भारत की आर्थिक मजबूती की दिशा तय करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और सशक्त करने का आधार भी बनेगा। ऐसे में वित्त मंत्री के पिटारे से निकलने वाली घोषणाओं पर देश ही नहीं, दुनिया की नजरें टिकी हैं।