यूजीसी एक्ट के विरोध में उपवास से पहले बॉर्डर पर रोके गए महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद

हरिद्वार,  शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर और श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर **यति नरसिंहानंद गिरी** को उत्तराखंड में प्रवेश करने से पुलिस ने रोक दिया। वह अपने सहयोगियों के साथ हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर प्रस्तावित **एक दिवसीय सांकेतिक उपवास** में शामिल होने जा रहे थे। यह उपवास उनके अनुसार यूजीसी एक्ट के विरोध में आयोजित किया जाना था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यति नरसिंहानंद गिरी अपने वर्ल्ड रिलिजियस कन्वेंशन की मुख्य संयोजक **डॉ. उदिता त्यागी** और अन्य शिष्यों के साथ उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा पर पहुंचे थे, जहां **उत्तराखंड पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया**। पुलिस कार्रवाई के बाद वे हरिद्वार नहीं पहुंच सके।

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने इस कदम को **अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन** बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से संत समाज का ध्यान यूजीसी एक्ट के विरोध की ओर आकर्षित करना चाहते थे। हालांकि, भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते वह और उनके सहयोगी आगे नहीं बढ़ पाए।

उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड बॉर्डर पर ही यति नरसिंहानंद गिरी ने संत समाज से अपील करते हुए कहा कि यूजीसी एक्ट को लेकर संत समाज की चुप्पी चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं और इस पर खुली चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं ऐसे मुद्दों पर मौन रहेंगी तो इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

इससे पहले 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर यति नरसिंहानंद गिरी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन की घोषणा की थी। उस दौरान **गाजियाबाद पुलिस ने शिवशक्ति धाम डासना को पुलिस छावनी में तब्दील कर उन्हें नजरबंद कर दिया था**, जिससे वे दिल्ली नहीं जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अशांति या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया। वहीं, यति नरसिंहानंद गिरी समर्थकों ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं।

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