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राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, संविधान लागू और अशोक स्तंभ—26 जनवरी का ऐतिहासिक सफर

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नई दिल्ली। भारतीय इतिहास में **26 जनवरी 1950** का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है। इसी दिन भारत ने स्वयं को **संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य** घोषित किया और देश में भारतीय संविधान विधिवत रूप से लागू हुआ। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही स्वतंत्र भारत को एक सुदृढ़ संवैधानिक पहचान प्राप्त हुई।

इस दिन औपनिवेशिक शासन से पूर्ण संवैधानिक स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक परिवर्तन हुआ। स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम गवर्नर जनरल **चक्रवर्ती राजगोपालाचारी** ने अपने पद से त्यागपत्र दिया और **डॉ. राजेंद्र प्रसाद** ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। यह परिवर्तन केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की मजबूत नींव था।

26 जनवरी 1950 को ही **उत्तर प्रदेश के सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के सिंहों** को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई। यह प्रतीक शक्ति, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इसी दिन वर्ष 1937 में गठित **भारतीय संघीय न्यायालय** का नाम बदलकर **सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया)** कर दिया गया, जिससे देश की न्यायिक व्यवस्था को नई पहचान मिली।

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सैन्य ढांचे के भारतीयकरण की दिशा में भी यह दिन ऐतिहासिक रहा। भारतीय नौसेना के युद्धपोत **एच.एम.आई.एस. दिल्ली** का नाम बदलकर **आई.एन.एस. दिल्ली** किया गया, जो स्वतंत्र भारत की सैन्य स्वायत्तता का प्रतीक बना।

26 जनवरी का महत्व केवल अतीत तक सीमित नहीं है। वर्ष 1930 में इसी दिन **स्वराज दिवस** मनाया गया था, जिसने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को जनआंदोलन का रूप दिया। आगे चलकर 26 जनवरी राष्ट्रीय गौरव और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बन गया।

आज गणतंत्र दिवस पर भव्य परेड, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के प्रति निष्ठा देश की एकता और अखंडता को दर्शाती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत की ताकत उसके संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों की सहभागिता में निहित है।

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