हरिद्वार, देश में तेजी से बढ़ रहे **फर्जी शंकराचार्यों और भगवाधारी कालनेमियों** के खिलाफ स्वामी **गोविन्दानंद सरस्वती महाराज** ने दिग्विजय यात्रा निकालने की घोषणा की है। यह यात्रा कर्नाटक प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल **हंपी स्थित पंपा सरोवर (किष्किन्धा)** से प्रारंभ होगी और देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेगी।
स्वामी गोविन्दानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं को बचाना और समाज को उन लोगों के प्रति जागरूक करना है, जो धर्म की आड़ में भ्रम फैलाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज धर्म और संत परंपरा के नाम पर कई ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो स्वयं को शंकराचार्य या धर्मगुरु बताकर सनातन समाज को गुमराह कर रहे हैं।
उन्होंने किष्किन्धा से यात्रा शुरू करने के पीछे का प्रतीकात्मक महत्व भी बताया। स्वामी गोविन्दानंद के अनुसार, **जिस प्रकार हनुमान जी ने कालनेमि का भेद खोलकर उसका अंत किया था**, उसी भाव के साथ यह दिग्विजय यात्रा भी फर्जी साधु-संतों और कथित शंकराचार्यों के असली चेहरे को उजागर करेगी।
स्वामी गोविन्दानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि जनवरी माह में यात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा और इसके दौरान देशभर में विभिन्न स्थानों पर जनसंवाद और पत्रकार वार्ताओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से फर्जी शंकराचार्यों और कालनेमियों की गतिविधियों, कार्यशैली और कथित दावों की जानकारी आम लोगों, विशेषकर सनातन धर्मावलंबियों तक पहुंचाई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि **सनातन धर्म की मर्यादा और शुद्ध परंपरा की रक्षा** के लिए निकाली जा रही है। स्वामी गोविन्दानंद का कहना है कि समाज में धर्म के नाम पर फैल रहे भ्रम और दिखावे को समाप्त करना आज समय की आवश्यकता है।
दिग्विजय यात्रा को लेकर संत समाज के एक वर्ग में समर्थन देखा जा रहा है, वहीं कई धार्मिक संगठनों ने भी इस अभियान को जागरूकता की दिशा में एक अहम कदम बताया है। आने वाले दिनों में यह यात्रा देशभर में चर्चा का विषय बनने की संभावना है।