प्राचीन भारतीय केमिस्ट्री से आधुनिक रिसर्च तक: NEP 2020 की नई तस्वीर

लुमामी (नगालैंड)। नगालैंड यूनिवर्सिटी ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों (Indian Knowledge Systems–IKS) को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। राज्य के एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अब रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) अनुशासन के भीतर भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर आधारित शिक्षण और अनुसंधान गतिविधियां शुरू कर दी हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के उद्देश्यों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा में प्रभावी ढंग से शामिल करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस क्रम में विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा तैयार किया गया वैल्यू-एडेड कोर्स **‘भारतीय ज्ञान प्रणालियों में रसायन विज्ञान’** को विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद से औपचारिक मंजूरी मिल गई है। यह कोर्स इस तथ्य को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है कि भारत की समृद्ध रासायनिक ज्ञान परंपराओं को ऐतिहासिक महत्व के बावजूद अब तक अकादमिक जगत में अपेक्षाकृत सीमित ध्यान मिला है। यह पाठ्यक्रम उसी कमी को भरने का प्रयास है।

नगालैंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जगदीश के. पटनायक ने बताया कि इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारतीय ज्ञान प्रणालियों के मूलभूत सिद्धांतों से परिचित कराना है। इसमें ज्ञान के पारंपरिक प्रसारण के तरीके, शैक्षणिक परंपराएं और उनके दार्शनिक आधार शामिल हैं। साथ ही यह कोर्स स्थिरता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और समकालीन वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में इन प्राचीन प्रथाओं की प्रासंगिकता की भी पड़ताल करता है।

उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम छात्रों को भारत में रसायन विज्ञान के ऐतिहासिक विकास से अवगत कराएगा और यह भी बताएगा कि किस प्रकार केमिस्ट्री का संबंध चिकित्सा विज्ञान, धातु विज्ञान, सामग्री विज्ञान और पर्यावरणीय प्रथाओं से रहा है। खास बात यह है कि यह कोर्स सभी विषयों के छात्रों के लिए खुला है, जिससे इसका अंतर-विषयक स्वरूप और व्यापक शैक्षणिक महत्व स्पष्ट होता है।

कुलपति प्रो. पटनायक ने छात्रों से इस कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया और इसे NEP 2020 के विज़न को धरातल पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की प्रो. उपासना बोरा सिन्हा और उनकी टीम को रसायन विज्ञान में भारतीय ज्ञान प्रणालियों से जुड़े शिक्षण और शोध को मजबूत करने में उनके नेतृत्व और समर्पण के लिए बधाई दी।

शिक्षण के साथ-साथ नगालैंड यूनिवर्सिटी इस क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान को भी सक्रिय रूप से समर्थन दे रही है। प्रो. उपासना बोरा सिन्हा वर्तमान में डॉक्टरेट ऑफ साइंस (D.Sc.) कार्यक्रम के अंतर्गत शोध कर रही हैं। उनका शोध विषय है— *“1500 ईसा पूर्व से 21वीं सदी तक भारत में केमिस्ट्री का कालानुक्रमिक अध्ययन: कम्प्यूटेशनल सिमुलेशन के माध्यम से प्राचीन रासायनिक ज्ञान को आधुनिक शोध से जोड़ना।”*

यह शोध आधुनिक विश्लेषणात्मक और कम्प्यूटेशनल तकनीकों का उपयोग कर भारत की रासायनिक ज्ञान परंपराओं की वैज्ञानिक जांच पर केंद्रित है। साथ ही यह भारत में केमिस्ट्री के इतिहास के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण में भी योगदान देता है—एक ऐसा कार्य जिसकी शुरुआत महान वैज्ञानिक प्रो. पी.सी. रे ने की थी और जिसे बाद में प्रो. बी.वी. सुब्बारायप्पा और प्रो. प्रियदरंजन रे जैसे विद्वानों ने आगे बढ़ाया।

कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो. उपासना बोरा सिन्हा ने कहा कि यह शिक्षण और शोध पहल छात्रों को प्रासंगिक शिक्षा, अंतर-विषयक अनुभव और रिसर्च-आधारित दृष्टिकोण प्रदान करती है। इससे छात्र न केवल भारत की वैज्ञानिक विरासत को समझ पाएंगे, बल्कि समकालीन वैश्विक चुनौतियों से भी आलोचनात्मक रूप से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से नगालैंड यूनिवर्सिटी स्वदेशी ज्ञान परंपराओं पर आधारित समावेशी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रही है।

 

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