संस्कारों के क्षरण पर चिंता, बाल्यावस्था से शिक्षा पर दिया जोर

अशोक सिंघल सेवा धाम, वात्सल्य वाटिका बहादराबाद में उत्तराखंड प्रांत के विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग द्वारा संचालित तीन दिवसीय संस्कारशाला आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का रविवार को समापन हो गया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद उत्तराखंड–उत्तर प्रदेश के संयुक्त क्षेत्र सेवा प्रमुख राधेश्याम द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में घर, विद्यालय और समाज में संस्कारों का क्षरण एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब बालक-बालिकाएं अपने सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन व्यवहार से कटने लगते हैं, तो वे दुष्प्रवृत्तियों के दुष्चक्र में फंस जाते हैं। ऐसे में बाल्यावस्था से ही संस्कारों का बीजारोपण कर सशक्त, समरस और राष्ट्रनिष्ठ समाज का निर्माण संभव है। संस्कारवान बालक-बालिकाएं ही भारत के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के आधार स्तंभ हैं।

प्रयागराज से आई केंद्रीय टीम की सदस्य डॉ. अंबालिका मिश्रा ने संस्कारशालाओं से जुड़ी बहनों को प्रशिक्षण देते हुए उन्हें अपने दायित्वों के प्रति जागृत किया। उन्होंने व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से संस्कार शिक्षा की आवश्यकता और उपयोगिता को रेखांकित किया।

इस अवसर पर प्रांत सेवा प्रमुख अनिल भारतीय ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के सेवा, संस्कार और संस्कृति के मूल भाव को आत्मसात करते हुए वात्सल्य वाटिका द्वारा आगामी समय में 25 ग्रामों में प्रशिक्षित आचार्याओं के माध्यम से संस्कार शिक्षा, हिंदुत्व जागरण और महिला सशक्तिकरण का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रयास समाज में व्यक्तित्व निर्माण, पारिवारिक समरसता और राष्ट्रबोध को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

प्रशिक्षण वर्ग का कुशल संयोजन वात्सल्य वाटिका के प्रबंधक प्रदीप मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में रवि जोशी, प्रमुख शिक्षिका मानसी भार्गव, प्रकल्प अधीक्षक अश्वनी शर्मा सहित वात्सल्य वाटिका के समस्त स्टाफ का उल्लेखनीय सहयोग रहा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.