रुद्रप्रयाग। सिद्धपीठ कालीमठ की कालीमाई की देवरा यात्रा गुरुवार को भगवान रुद्रनाथ की नगरी रुद्रप्रयाग पहुंची, जहां पूरे नगर में धार्मिक उल्लास और भक्तिभाव का वातावरण देखने को मिला। जैसे ही कालीमाई की डोली ने नगर में प्रवेश किया, जय मां कालीमाई के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। विभिन्न स्थानों पर भक्तों ने पुष्पवर्षा कर देवी का भव्य स्वागत किया।
गुरुवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कालीमाई की देवरा यात्रा अगस्त्यमुनि से रुद्रप्रयाग के लिए रवाना हुई। यात्रा के दौरान सिल्ली, रामपुर, तिलवाड़ा सहित कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने देवी की डोली का श्रद्धा के साथ स्वागत किया। अपराह्न बाद डोली रुद्रप्रयाग पहुंची, जहां अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम तट पर स्थित मां चामुंडा देवी मंदिर और भगवान रुद्रनाथ मंदिर की परिक्रमा कर नगर भ्रमण शुरू हुआ।
नगर पालिका पार्किंग के समीप बदरी-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने समिति की ओर से डोली का पुष्प मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देवरा यात्रा उत्तराखंड की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा है, जो लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखती है। उन्होंने यात्रा के बेहतर आयोजन और व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया।
इसके बाद देवी की डोली नगर के मुख्य बाजार पहुंची, जहां भक्तों को आशीर्वाद दिया गया। देर शाम डोली रात्रि विश्राम के लिए महादेव मोहल्ला पहुंची। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए और रातभर भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ।
कालीमाई पंचगाई समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने बताया कि कालीमठ की कालीमाई 15 वर्षों बाद देवरा यात्रा पर निकली हैं। देवी इन दिनों जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर जाकर भक्तों की कुशलता पूछ रही हैं। उन्होंने बताया कि देवी 13 जनवरी को देवप्रयाग पहुंचेंगी और 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर पवित्र स्नान करेंगी।
इस अवसर पर समिति पदाधिकारी, बदरी-केदार मंदिर समिति के अधिकारी, व्यापारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

