घर की चौखट से बाज़ार तक: ‘पिस्यूं लूण’ ने कैसे बदली सुचिता सकलानी की तक़दीर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलायी जा रही योजनाएं अब जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम देने लगी हैं। स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय आजीविका से जुड़कर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि अपने गांव और क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर भी सृजित कर रही हैं।

टिहरी गढ़वाल जिले के विकासखंड जौनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत हवेली की सुचिता सकलानी ऐसी ही प्रेरणादायी कहानी बनकर उभरी हैं। वर्ष 2023 तक एक सामान्य गृहिणी रहीं सुचिता आज गंगा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। इस समूह से छह महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं और मिलकर आजीविका के क्षेत्र में नई पहचान बना चुकी हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के मार्गदर्शन में गंगा स्वयं सहायता समूह ने मार्च 2023 में पारंपरिक पहाड़ी उत्पाद ‘पिस्यूं लूण’ का उत्पादन शुरू किया। यह विशेष नमक पहाड़ी जड़ी-बूटियों को सिलबट्टे पर पीसकर तैयार किया जाता है। कददूखाल क्षेत्र में निर्मित यह उत्पाद अपने विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता के कारण तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

ग्राम पंचायत हवेली द्वारा सिद्धपीठ माँ सुरकंडा मंदिर के समीप स्थापित NRLM आउटलेट में ‘पिस्यूं लूण’ के साथ-साथ अचार, बुरांश और माल्टा जूस, मोटा अनाज, दालें एवं मसालों की बिक्री की जा रही है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच इस पहाड़ी नमक की विशेष मांग देखी जा रही है।

नवंबर 2025 तक समूह ने ₹18.50 लाख का कुल टर्नओवर और ₹12.00 लाख की शुद्ध बचत अर्जित की है। समूह की सभी सदस्य महिलाएं आज लखपति दीदी बन चुकी हैं। विकासखंड जौनपुर द्वारा समूह को ₹20,000 का रिवॉल्विंग फंड तथा ₹4.50 लाख का बैंक लिंकेज प्रदान किया गया, जिससे उनके व्यवसाय को मजबूती मिली।

परियोजना निदेशक डीआरडीए पुष्पेंद्र चौहान ने बताया कि सुचिता सकलानी और गंगा स्वयं सहायता समूह की यह सफलता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के महिला सशक्तिकरण विज़न का सशक्त उदाहरण है। यह कहानी दर्शाती है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को बाज़ार से जोड़कर पहाड़ की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।

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