125 साल बाद लौटीं बुद्ध की पवित्र निशानियां, मोदी बोले—यह हमारी सभ्यता की जीवंत आत्मा है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भारत के लिए केवल ऐतिहासिक धरोहर या संग्रहालय की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये हमारी सभ्यता की जीवंत, पवित्र और अटूट पहचान हैं। बुद्ध का ज्ञान और उनका मार्ग केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति, करुणा और प्रकाश का संदेश देता है।

प्रधानमंत्री ने राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपराहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी *‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’* का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में 1898 में खोजे गए बुद्धकालीन अवशेषों और कलाकृतियों को एक सदी से अधिक समय बाद पहली बार वैश्विक मंच पर इतने भव्य स्वरूप में प्रदर्शित किया गया है।

प्रधानमंत्री ने थाईलैंड, वियतनाम, मंगोलिया, रूस, श्रीलंका, नेपाल, जापान सहित अनेक देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि 125 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद बुद्ध की पवित्र निशानियां भारत की धरती पर लौटी हैं। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता की पुनर्स्थापना का प्रतीक बताया और गोदरेज समूह का आभार जताया, जिसने इन अवशेषों की सार्वजनिक नीलामी रोकने और भारत में उनकी वापसी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि औपनिवेशिक काल में पिपराहवा के अवशेषों को निष्प्राण वस्तुएं समझकर देश से बाहर ले जाया गया, जबकि भारत के लिए ये पूज्य और पवित्र हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत न केवल इन अवशेषों का संरक्षक है, बल्कि बुद्ध परंपरा का जीवंत संवाहक भी है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि थाईलैंड, वियतनाम, मंगोलिया और रूस जैसे देशों में इन अवशेषों के दर्शन के लिए करोड़ों श्रद्धालु उमड़े, जिससे यह सिद्ध होता है कि भगवान बुद्ध सभी को जोड़ते हैं। उन्होंने बुद्ध परंपरा से अपने निजी जुड़ाव का उल्लेख करते हुए भारत और विदेशों में बौद्ध स्थलों के संरक्षण, पुनर्निर्माण और विकास के प्रयासों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि भारत बौद्ध विरासत को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए बौद्ध सर्किट का विकास कर रहा है। साथ ही, पाली भाषा को बढ़ावा देकर बुद्ध के धम्म को उसकी मूल भावना में दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बुद्ध का संदेश “अत्त दीपो भव” आत्मनिर्भरता, शांति और वैश्विक कल्याण का मार्ग दिखाता है।

 

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