नई दिल्ली। भारतीय बैडमिंटन के लिए वर्ष 2025 आत्ममंथन और सीख का साल साबित हुआ, लेकिन अब 2026 को लेकर उम्मीदों की नई किरण दिखाई दे रही है। चोटों, अस्थिर प्रदर्शन और शुरुआती दौर में हार के बावजूद भारतीय शटलरों ने बीते वर्ष कई ऐसे संकेत दिए, जो आने वाले समय में बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। अब नजरें 2026 पर टिकी हैं, जब भारतीय खिलाड़ी वैश्विक मंच पर नए इतिहास रचने की तैयारी में हैं।
पिछले वर्ष जहां पीवी सिंधु, एचएस प्रणॉय और किदांबी श्रीकांत जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को संघर्ष करना पड़ा, वहीं युवा खिलाड़ियों ने उम्मीद जगाई। लक्ष्य सेन ने ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतकर लगभग दो साल बाद अंतरराष्ट्रीय खिताब हासिल किया। महिला युगल में गायत्री गोपीचंद और त्रिशा जॉली ने सैयद मोदी इंटरनेशनल जीतकर अपनी मजबूती साबित की। वहीं 20 वर्षीय आयुष शेट्टी ने यूएस ओपन सुपर 300 का खिताब जीतकर भविष्य का संकेत दिया। 16 वर्षीय तन्वी शर्मा ने विश्व जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा।
पुरुष युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने भी शानदार प्रदर्शन किया। चोटों के बावजूद उन्होंने वर्ल्ड टूर फाइनल्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर कांस्य पदक जीता और निरंतरता का परिचय दिया।
अब 2026 का कैलेंडर भारतीय बैडमिंटन के लिए बेहद अहम है। साल की शुरुआत मलेशिया ओपन और इंडिया ओपन से होगी। फरवरी में एशियन टीम चैंपियनशिप, मार्च में प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन और अप्रैल में थॉमस व उबर कप खेले जाएंगे। अगस्त में भारत पहली बार 17 साल बाद वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा, जो भारतीय खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम अवसर होगा।
सितंबर में एशियन गेम्स और वर्ष के अंत में वर्ल्ड टूर फाइनल्स के साथ 2026 एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अनुभव, युवा जोश और घरेलू समर्थन के दम पर भारतीय बैडमिंटन अब विश्व मंच पर नई पहचान बनाने को तैयार है।