नई दिल्ली। भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम के लिए साल 2025 उम्मीदों के विपरीत निराशा भरा साबित हुआ। बेहतर प्रदर्शन की आस में शुरू हुआ यह वर्ष टीम के लिए निरंतर संघर्ष और असफलताओं का प्रतीक बन गया। एएफसी एशियन कप क्वालिफायर्स से बाहर होना और फीफा रैंकिंग में गिरावट ने “ब्लू टाइगर्स” के अभियान को गहरा झटका दिया।
हालांकि, 2024 की तुलना में 2025 में टीम ने कुछ बेहतर प्रदर्शन जरूर किया, लेकिन निरंतरता की कमी साफ दिखाई दी। बीते साल भारत एक भी मुकाबला जीतने में सफल नहीं हो पाया था, जबकि 2025 में कुछ जीत दर्ज हुईं, फिर भी बड़े मंच पर टीम खुद को साबित नहीं कर सकी।
इस साल टीम के कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव देखने को मिला। मनोलो मार्केज़ की जगह खालिद जमील को मुख्य कोच बनाया गया। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने सेंट्रल एशियन फुटबॉल एसोसिएशन (CAFA) नेशंस कप में सकारात्मक शुरुआत की। भारत ने मजबूत ताजिकिस्तान को नियमित समय में हराया और ओमान को पेनल्टी शूटआउट में मात देकर तीसरा स्थान हासिल किया। इन जीतों ने कुछ समय के लिए उम्मीदें जगाईं।
लेकिन यह लय ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी। एशियन कप क्वालिफायर्स में भारत को अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली सिंगापुर और बांग्लादेश जैसी टीमों से हार झेलनी पड़ी, जिससे क्वालिफिकेशन की उम्मीदें टूट गईं।
साल की एक बड़ी घटना दिग्गज स्ट्राइकर सुनील छेत्री की वापसी रही। फैंस को उम्मीद थी कि उनका अनुभव टीम को नई दिशा देगा, लेकिन परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे। अंततः निराशाजनक प्रदर्शन के बाद छेत्री ने नवंबर में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से फिर संन्यास ले लिया।
कुल मिलाकर 2025 भारतीय फुटबॉल के लिए आत्ममंथन का वर्ष रहा। कुछ सकारात्मक संकेतों के बावजूद टीम बड़े मुकाबलों में दबाव नहीं झेल पाई। अब नजरें भविष्य पर टिकी हैं, जहां टीम को नए सिरे से रणनीति, निरंतरता और युवा प्रतिभाओं के बेहतर इस्तेमाल के साथ वापसी करनी होगी।