देहरादून। शीतलहर और बर्फबारी के संभावित प्रभावों को देखते हुए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाला जमने से होने वाली दुर्घटनाओं और बर्फबारी के दौरान सड़कों के अवरुद्ध होने की स्थितियों को गंभीरता से लेते हुए विभागों को अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
जिलाधिकारी ने सभी तहसीलों और नगर निकायों को प्रमुख सार्वजनिक स्थानों—बस स्टैंड, चौराहे, पड़ाव आदि—पर अलाव जलाने और जरूरतमंदों को निःशुल्क कंबल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि अलाव और कंबल वितरण की जियोटैग फोटो प्रतिदिन जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को भेजी जाए। नगर निकायों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्थायी और अस्थायी रैन बसेरों में पेयजल, बिजली, बिस्तर, शौचालय और सफाई की पूरी व्यवस्था रहे। प्रत्येक निकाय को एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर उसकी जानकारी नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि शीतलहरी के दौरान कोई भी व्यक्ति खुले स्थानों पर रात्रि न बिताए। जिला पूर्ति अधिकारी को दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न और ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा गया है। जल संस्थान को पेयजल आपूर्ति के निर्बाध संचालन के लिए वैकल्पिक योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी को स्वास्थ्य केंद्रों व अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने तथा आपात सेवाओं में तैनात डॉक्टरों की अद्यतन सूची नियंत्रण कक्ष को भेजने को कहा गया है। लोक निर्माण विभाग को पाला प्रभावित सड़कों पर नियमित रूप से चूना और नमक का छिड़काव करने तथा बर्फबारी की स्थिति में मार्ग साफ रखने के लिए पर्याप्त संख्या में जेसीबी मशीनें तैनात रखने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित इंजीनियरों और ऑपरेटरों की सूची भी उपलब्ध कराने के आदेश हुए।
साथ ही, बर्फबारी के दौरान पर्यटक स्थलों में फंसे यात्रियों की सहायता के लिए जिला पर्यटन अधिकारी और उपजिलाधिकारियों को आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। होटल, होमस्टे और पर्यटक आवास संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे अतिरिक्त किराया न लें और दर सूची अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। नगर निकायों को निराश्रित गौवंश के लिए गौशालाओं में आश्रय, अलाव और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी हुए हैं।