पुट्टापर्थी (आंध्र प्रदेश)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री सत्य साईं बाबा के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि सार्वभौमिक प्रेम, शांति और सेवा का विराट उत्सव है। उन्होंने कहा कि साईं बाबा ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को अपने कार्यों के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाया और आज भी करोड़ों लोगों के जीवन में मार्गदर्शक बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बाबा को समर्पित 100 रुपये का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया। उन्होंने बताया कि समारोह से पूर्व उन्हें साईं बाबा की समाधि पर श्रद्धांजलि देने का सौभाग्य मिला, जिसे उन्होंने अत्यंत प्रेरणादायी क्षण बताया।
मोदी ने कहा कि भारतीय सभ्यता की जड़ें सेवा और करुणा में निहित हैं और यही रास्ता भक्ति, ज्ञान और कर्म सभी मार्गों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि बाबा की शिक्षाएं केवल आश्रमों तक सीमित नहीं रहीं बल्कि समाज के हर वर्ग—शहरों, गांवों, आदिवासी क्षेत्रों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं—तक फैलीं। प्रधानमंत्री ने बाबा के एक प्रमुख संदेश का उल्लेख करते हुए कहा, “मदद हमेशा करो, कभी चोट मत पहुंचाओ। ज्यादा बातें नहीं, ज्यादा काम करो।”
प्रधानमंत्री ने समारोह में सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 20 हजार बेटियों के नए खाते खोले जाने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने बताया कि देशभर में अब तक 4 करोड़ से अधिक बेटियों के खाते खुल चुके हैं और इनमें सवा तीन लाख करोड़ रुपये जमा हैं। उन्होंने कहा कि यह बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रति समाज की प्रतिबद्धता का बड़ा उदाहरण है।
मोदी ने कहा कि बीते 11 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2014 में जहां 25 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में थे, वहीं आज यह संख्या 100 करोड़ तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए बनाई गई भारतीय योजनाएं अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चा का विषय बन चुकी हैं।
प्रधानमंत्री ने रवांडा में ‘गिरिंका’ परंपरा में भारत की मदद, ‘लोकल फॉर वोकल’, स्थानीय उत्पादों के संरक्षण और आत्मनिर्भरता को भी प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि साईं बाबा की शताब्दी उत्सव की प्रेरणा आगामी पीढ़ियों का मार्ग आलोकित करती रहेगी।