21वीं सदी में अब तक दुनिया दो बड़े युद्धों—रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास-ईरान संघर्ष—की गवाह बन चुकी है। इन युद्धों ने दुनिया भर के नेशनल सिक्योरिटी मैकेनिज्म को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में भारत भी अपने डिफेंस सिस्टम और मिसाइल तकनीक को अपग्रेड करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अब चीन की उन्नत PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल की कुछ खास तकनीकों को देश में विकसित हो रही Astra Mark-2 परियोजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।
यह फैसला उस समय लिया गया जब मई 2025 में पाकिस्तान द्वारा दागी गई एक PL-15E मिसाइल बिना फटे भारत के पंजाब के होशियारपुर जिले में मिली। मिसाइल को पाकिस्तान वायुसेना के JF-17 या J-10C फाइटर जेट से दागा गया था, लेकिन यह अपने लक्ष्य को नहीं भेद सकी और भारतीय सीमा में करीब 100 किलोमीटर अंदर आ गिरी।
इस मिसाइल में सेल्फ-डिस्ट्रक्ट सिस्टम न होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हालत में बरामद की गई। बाद में DRDO के वैज्ञानिकों ने इसका तकनीकी विश्लेषण किया और पाया कि इसमें कई ऐसी उन्नत विशेषताएँ हैं जिन्हें भारत अपने मिसाइल प्रोग्राम में इस्तेमाल कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, Astra Mark-2 में अब PL-15 के एडवांस गाइडेंस, ट्रैकिंग और रडार सीकिंग सिस्टम जैसी खूबियाँ शामिल की जा रही हैं, जिससे यह मिसाइल 160 किलोमीटर से अधिक दूरी तक दुश्मन के विमान को मार गिराने में सक्षम होगी।
यह पूरी घटना ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई थी, जो भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया था।