डोभाल का बड़ा बयान: भारत-चीन संबंधों में दिखा सुधार, क्या बदलेगी रणनीति?

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच रिश्तों में नरमी और सकारात्मक बदलाव की झलक एक बार फिर दिखी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने मंगलवार को कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात के बाद से संबंधों में सुधार हुआ है और इससे आगे बढ़ने की दिशा में मदद मिली है।

डोभाल चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशिष्ट प्रतिनिधि स्तर की 24वीं बैठक से पहले बोल रहे थे। उन्होंने श्री वांग और उनके शिष्टमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले नौ महीनों में सीमाओं पर शांति और सौहार्द ने द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती दी है। डोभाल ने कहा, “पिछले नौ महीनों में सीमाएँ शांत रही हैं और आपसी विश्वास बढ़ा है। हमारे नेताओं ने पिछले वर्ष कज़ान में जो नई दिशा दी थी, उसका सकारात्मक असर साफ दिख रहा है।”

एनएसए ने उम्मीद जताई कि यह वार्ता पिछली चर्चाओं की तरह सफल रहेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही चीन की यात्रा पर जाएंगे और वहाँ एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। ऐसे में यह संवाद और भी अहम हो जाता है।

डोभाल ने भारत-चीन राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने पर भी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक पड़ाव है, जो दोनों देशों को और करीब ला सकता है। उनका मानना है कि वर्तमान सकारात्मक माहौल से व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

विदित हो कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने सीमा प्रबंधन और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

अब सबकी नजर प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित चीन यात्रा और एससीओ शिखर सम्मेलन पर है, जहाँ भारत-चीन रिश्तों में नई दिशा की झलक देखने को मिल सकती है।

 

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