हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार तड़के मूसलाधार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने तबाही मचा दी। उत्तरशाल, बथेरी आरंग, बागी नाला और सनोरघाटी समेत कई क्षेत्रों में घरों में मलबा घुस गया, गाड़ियां और मवेशी बह गए तथा लोगों की जमीनें और दुकानें भारी नुकसान की चपेट में आ गईं।
मंडी-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-21) पर भी यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। हनोगी जागणी मंदिर के पास भूस्खलन से सड़क बंद हो गई, जबकि थालौट के पास शालानाल नाले में बादल फटने से पानी का रौद्र रूप देखने को मिला। इस बाढ़ ने नाले के किनारे बने एफकॉन कंपनी के कार्यालय सहित कई भवनों को क्षति पहुंचाई। टनल के मुहाने पर बाढ़ का पानी घुसने से अंदर भारी तबाही मची है।
सनोरघाटी और टकोली सब्जी मंडी में भी स्थिति गंभीर हो गई। अचानक नाले का पानी मंडी परिसर में घुस गया, जिससे दुकानों, गोदामों और सब्जियों का बड़ा हिस्सा बह गया। एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, बल्कि व्यापारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने सरकार से प्रभावितों को तुरंत राहत और सहायता देने की मांग की है।
उधर, लगातार हो रही बारिश से ब्यास नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी के कैचमेंट एरिया में तबाही के चलते बड़ी मात्रा में मिट्टी और गाद पानी में मिल गई है, जिससे नदी और अधिक खतरनाक हो गई है। प्रशासन ने लोगों को सख्त चेतावनी जारी करते हुए नदी के किनारों से दूर रहने की अपील की है।
उत्तरशाल और अमरगढ़ क्षेत्र में भी नाले की बाढ़ से खेत, मकान और गाड़ियां बह गईं। कटौला के पास बागी नाले में मलबा आने से कटौला-माहौर को जोड़ने वाला पुल पूरी तरह बह गया। नदी ने अपना रास्ता बदलकर लोगों की जमीनों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है।
कुन्नू नाले में पानी भरने से रविवार सुबह जलभराव की स्थिति पैदा हो गई, जिसे जेसीबी की मदद से सुचारू किया गया। वहीं, नगवाई, औट और मसोराना क्षेत्रों में भी मलबा और पत्थर गिरने से एनएच-21 जगह-जगह बाधित हुआ है। सड़क बहाली का काम युद्धस्तर पर जारी है।