अमेठी में तेंदुए की मौत से खत्म हुआ खौफ! जानिए कैसे भैंसों ने लिया बदला
15 साल से शांत तेंदुआ कैसे बना आदमखोर? पूरी कहानी चौंका देगी
अमेठी, उत्तर प्रदेश। जिले के मुसाफिरखाना तहसील अंतर्गत नेवादा ग्राम सभा के दो गांवों में बीते शनिवार से एक जंगली तेंदुए का आतंक छाया हुआ था। इस तेंदुए के हमले में अब तक लगभग आधा दर्जन लोग घायल हो चुके थे। डर के माहौल में ग्रामीणों की रातें डरावनी हो गई थीं। लेकिन रविवार सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे गांव को राहत की सांस दी—तेंदुए की मौत हो चुकी थी, और वो भी भैंसों के हमले से ।
शनिवार दोपहर से ही तेंदुआ गांव में इधर-उधर घूमता दिखा। किसी को नहीं पता था कि वह अचानक से हमला कर देगा। सूचना मिलते ही वन विभाग , पुलिस , और पीएसी की टीमें मौके पर पहुंच गईं। जिलाधिकारी संजय चौहान ने बताया कि जब पहली बार यह जानकारी मिली कि किसी ग्रामीण पर जंगली जानवर ने हमला किया है, तो उन्होंने तत्काल एसडीएम मुसाफिरखाना को कार्रवाई के निर्देश दिए।
जब टीम ने गांव का सर्वे किया तो स्पष्ट हुआ कि हमला करने वाला जानवर तेंदुआ है। डर के कारण ग्रामीण घरों में बंद हो गए और खेतों में काम करना बंद कर दिया। तेंदुए को पकड़ने के लिए लखनऊ और बहराइच से एक्सपर्ट रेस्क्यू टीमों को बुलाने की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन इससे पहले ही तेंदुआ पास के जंगलों में भाग गया था।
रविवार सुबह करीब 5:30 बजे सूचना मिली कि तेंदुए ने गांव के भैंसों के तबेले में घुसकर हमला किया। लेकिन इस बार शिकार आसान नहीं था। भैंसों ने जोरदार जवाबी हमला किया, जिससे तेंदुए की मौत हो गई। यह खबर मिलते ही ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने कहा कि अब उन्हें चैन से रात गुजारने को मिलेगी।
वन विभाग की टीम और स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही तेंदुए की मौत का सटीक कारण पता चल सकेगा। फिलहाल, तेंदुए के सिर पर चोट और सूजनपाई गई है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वह घायल होने के कारण शिकार करने में असमर्थ था और इसी कारण आबादी क्षेत्र में आ गया।
जांच में यह भी पता चला कि यह तेंदुआ करीब 15 वर्षों से उसी जंगल में रह रहा था, लेकिन अब तक कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया था। यही कारण है कि वन विभाग यह जांच कर रहा है कि अचानक यह आदमखोर क्यों हो गया।
तेंदुए के शव को भले सुल्तान शौर्य वनस्थली, कादूनाला ले जाया गया, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। साथ ही, एक था बहादुरनामक स्मारक की आधारशिला भी वहीं रखी जाएगी, ताकि इस घटना को हमेशा के लिए याद रखा जा सके।