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यमुना-चंबल की बाढ़ से किसानों की बर्बादी! क्या मिलेगा मुआवज़ा?

हजारों बीघा फसल डूबी, किसान बेहाल — प्रशासन की अगली चाल क्या होगी?

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औरैया, उत्तर प्रदेश। जिले में यमुना और चंबल नदियों में आई अचानक और तेज़ बाढ़ ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खासतौर पर अजीतमल और औरैया तहसील के कई गांव इस आपदा की चपेट में आए हैं, जहां हजारों बीघा फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।

सबसे अधिक नुकसान बाजरे की फसल को हुआ है। किसान अब भारी आर्थिक संकट में हैं और आगामी फसल की तैयारी तक नहीं कर पा रहे। अजीतमल तहसील के असेवा गांव निवासी किसान राजवीर शर्मा ने बताया कि उन्होंने 18 बीघा में बाजरे की खेती की थी, जिसमें उन्होंने बीज, खाद, कीटनाशक और ट्रैक्टर से जुताई पर हजारों रुपये खर्च किए। लेकिन बाढ़ का पानी खेतों में घुस गया और पूरी फसल सड़कर बर्बाद हो गई।

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राजवीर जैसे सैकड़ों किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उनकी मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द क्षेत्र का सर्वे करवाकर उचित मुआवज़ादे। किसान यह भी कह रहे हैं कि जब तक नुकसान की भरपाई नहीं होगी, तब तक अगली बुवाई करना असंभव है।

बाढ़ के कारण खेतों में बालू और कीचड़ भर गया है, जिससे भविष्य में खेती करना भी कठिन हो सकता है। इससे सिर्फ मौजूदा फसल ही नहीं, बल्कि अगली फसल का भविष्य भी अधर में है। उपजिलाधिकारी अजीतमल, निखिल राजपूत** ने कहा है कि प्रशासन द्वारा एक टीम गठित की जा रही है, जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर नुकसान का आकलन करेगी। इसके बाद किसानों को यथासंभव मुआवज़ा देने की कार्रवाई की जाएगी।

 

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