सत्यनारायण मिश्रा। वरिष्ठ पत्रकार
आईजोल।
मिजोरम में तेल टैंकर चालकों ने जर्जर रास्तों पर वाहन चलाने में खतरों के कारण हड़ताल कर दी है। इससे समूचे राज्य में तेल डिपो में सूखा पड़ गया है। ईंधन संकट ने राज्य को हिला कर रख दिया है। मिजोरम ऑयल टैंकर ड्राइवर एसोसिएशन (एमओटीडीए) ने खराब सड़क हालत और खतरनाक रास्तों का हवाला देते हुए सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं, जिससे तेल टैंकरों की आपूर्ति ठप हो गई है। खासकर NH-6 और NH-306 जैसे प्रमुख राजमार्गों पर भूस्खलन और गड्ढों ने स्थिति को और बंद से बदतर कर दिया है। परिणामस्वरूप, आइजोल और आसपास के इलाकों में पेट्रोल पंप सूख गए हैं, और लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह संकट रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपने वाहनों पर निर्भर हैं।
राज्य सरकार इस बारे में तीन दिनों से पूरी तरह मौन साधे है। दो-तीन दिन यही रहा तो राज्य में सुरक्षित तेल भंडार खत्म हो सकता है। मिजोरम ऑयल टैंकर ड्राइवर्स एसोसिएशन (एमओटीडीए) ने एक बयान में कहा कि एनएच-6/306 का साइरांग-कावन्पुई खंड इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है कि अब तेल टैंकरों के लिए चलना सुरक्षित नहीं है। जब तक रास्ते को ट्रकों के चलने लायक नहीं बना दिया जाता, सेवाएं रुकी रहेंगी। आईजोल के पेट्रोल पंपों बाहर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। तमाम जरूरी सामानों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल रहा है।
एनएच-306 मिज़ोरम की जीवन रेखा है, जो असम के सिलचर शहर के ज़रिए राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। तेल सहित सभी आपूर्ति राज्य के बाहर से इसी राष्ट्रीय राजमार्ग के ज़रिए आती है। राजमार्ग के एक हिस्से को एनएच-6 कहा जाता है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की निदेशक साइज़िक्पुई ने कहा है कि अगर टैंकर इसीतरह सड़कों से नदारद रहे तो राज्य को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। टैंकरों ने सड़कों की खराब स्थिति के कारण परिचालन बंद कर दिया है, जो राज्य सरकार के नियंत्रण से बाहर है। कोलासिब जिले के कावन्पुई से डर्टलांग होते हुए आइज़ोल तक एक संकरा उपमार्ग है, जो ट्रकों के गुजरने लायक चौड़ा नहीं है। चिंता की बात यह भी है कि मिज़ोरम में कोई तेल डिपो नहीं है। अगर पूरे राज्य के तमाम पेट्रोल पंप पूरी तरह स्टाक रखे हों, तब भी ऐसे हालात में वे बमुश्किल एक सप्ताह तक ही आम जरूरतें पूरी कर सकेंगे। अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने अभी तक पेट्रोल और डीजल की राशनिंग के लिए अलग से कोई आदेश फिलहाल जारी नहीं हुआ। लेकिन, संकट गहराने पर सरकार की ओर से जारी कूपन के आधार पर ही वाहन चालकों को ईंधन वितरित किया जाएगा।
मरम्मत कार्य 10 जुलाई को शुरू हुआ मरम्मत कार्य भारी यातायात और बारिश के कारण तेजी नहीं पकड़ सका।
राज्य में जरूरी चीजों के अभाव और मूल्य वृद्धि:
ईंधन की कमी ने राज्य के कई हिस्सों में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर असर डाला है। आइजोल, लुंग्लेई और चम्फाई जैसे प्रमुख शहरों में दूध, सब्जियां, और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की डिलीवरी प्रभावित हुई है, क्योंकि ट्रकों को सड़कों पर आने में दिक्कत हो रही है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट के कारण दाल, चावल, और खाना पकाने के तेल की कीमतें 15-20% तक बढ़ गई हैं। साइहा और लॉन्ग्त्लाई जैसे दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में, जहां पहले से ही परिवहन सीमित है, लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए जूझना पड़ रहा है। कालाबाजारी की शिकायतें भी बढ़ी हैं, जिससे बस्तियों में तनाव और पैदा हो रहा है।
जिनके पास ई-स्कूटर हैं, उनकी तोबल्ले-बल्ले
इस गंभीर संकट के बीच इलेक्ट्रिक स्कूटर सवारों की मौज हो गयी है। हालांकि, इन सबने इस मौके पर भी एक अत्यंत सराहनीय और सकारात्मक पहलू खोज लिया है। राजधानी आईजोल में ई-स्कूटर चालकों ने “Green Mizoram Rally” निकाल नाम से निकाली गई रैली बड़ा संदेश दिया है। सैकड़ों ई-स्कूटर चालकों ने इसमें हिस्सा लिया। ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया। स्कूटरों को मिजो संस्कृति से प्रेरित सजावट से सजाया गया और सवारों ने लोकगीत गाते हुए शहर की सड़कों पर “No Fuel, No Problem!” जैसे नारे लगाये। स्थानीय युवा कहते हैं कि यह रैली न केवल मजेदार रही, बल्कि यह भी दिखाया कि ई-स्कूटर भविष्य के विकल्प हो सकते हैं। रैली के माध्यम से लोगों ने सरकार से चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने और सब्सिडी देने की मांग की है, जिसे लोगों ने खूब समर्थन दिया।
मिजोरम में हाल के हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कमी ने लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होने को मजबूर किया है। ऐसे में इलेक्ट्रिक स्कूटर सवारों ने दिखाया कि बैटरी से चलने वाले वाहन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि इस तरह के संकटों में भी विश्वसनीय विकल्प हो सकते हैं। एक स्थानीय युवा ललरेमरुआता ने कहा, “हमारा मकसद सिर्फ रैली निकालना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि मिजोरम जैसे पहाड़ी राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य के माध्यम हो सकते हैं।
कुल मिलाकर मिजोरम का यह ईंधन संकट चुनौती भरा है, लेकिन ई-स्कूटर रैली ने इसमें भी भविष्य की एक उम्मीद की किरण दिखायी है। सड़क मरम्मत और आपूर्ति बहाल होने तक, स्थानीय लोग इस नवाचार को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। क्या यह बदलाव लंबे समय तक टिकेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।