Haridwar:उत्तराखंड के प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक संस्थानों ऋषिकुल और गुरुकुल आयुर्वेदिक चिकित्सालयों के कर्मचारियों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। पिछले पांच माह से वेतन नहीं मिलने से परेशान कर्मचारियों ने शनिवार को सड़कों पर उतरकर भीख मांगकर अनोखे ढंग से विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं, बल्कि यदि जल्द वेतन नहीं दिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
चिकित्सालय कर्मचारियों का यह प्रदर्शन ऋषिकुल तिराहे से शुरू होकर मुख्य मार्गों से गुजरते हुए जनता का ध्यान आकर्षित करता रहा। कर्मचारियों ने हाथों में कटोरे लेकर भीख मांगी और पोस्टर-बैनरों पर लिखा था — “पांच महीने से भूखे हैं, तनख्वाह चाहिए, दया नहीं!”
प्रशासन पर बरगलाने का आरोप
कर्मचारी संयुक्त समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के.एन. भट्ट, नर्सेस संवर्ग की नेता सुनीता तिवारी, मुख्य फार्मेसी अधिकारी संध्या रतूड़ी, वरिष्ठ पदाधिकारी समीर पांडे और अनिल नेगी, अमित लांबा आदि ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले दो सप्ताह से कर्मचारियों को झूठे आश्वासन देकर बरगलाने का कार्य कर रहा है। “हमसे कहा गया कि जल्द वेतन जारी होगा, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया है,” उन्होंने कहा।
समिति के अनुसार, संघर्ष समिति के निर्णय के तहत यह प्रदर्शन किया गया, और अगर प्रशासन ने इसे हल्के में लिया, तो आंदोलन और भी बड़े स्तर पर किया जाएगा।
वेतन नहीं, बैंक के नोटिस मिल रहे
विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, उपशाखा अध्यक्ष छत्रपाल सिंह, मंत्री मनीष पंवार, आयुर्वेदिक फार्मेसी के अध्यक्ष अशोक कुमार, तथा उत्तराखंड आयुर्वेदिक यूनानी सेवाएं के प्रदेश महामंत्री के.के. तिवारी ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण कई कर्मचारियों के घरों में बैंकों द्वारा लोन की किश्तें न भरने पर नोटिस चस्पा किए जा चुके हैं। कुछ कर्मचारियों की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि उन्हें घरों में भोजन जुटाना मुश्किल हो गया है।
“कई कर्मचारियों ने बच्चों की स्कूल फीस नहीं भर पाई है, बिजली-पानी के बिल नहीं दे पाए हैं। अब सवाल आत्मसम्मान से जुड़ा है,” – उन्होंने कहा।
आंदोलन की अगली रणनीति तैयार
कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 17 और 18 जुलाई तक वेतन जारी नहीं किया गया, तो वे एक विशाल महारैली आयोजित करेंगे और विश्वविद्यालय प्रशासन का पुतला दहन करेंगे। इस चेतावनी को कर्मचारियों ने लिखित रूप में प्रशासन को भी सौंपा है।
प्रदर्शन के दौरान उपस्थित रहे सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन राज्यव्यापी किया जाएगा। इसके तहत देहरादून में सचिवालय का घेराव, प्रेस कॉन्फ्रेंस और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की योजना भी बनाई जा रही है।
प्रदर्शन में सैकड़ों कर्मचारियों की भागीदारी
धरना-प्रदर्शन और सड़कों पर उतरकर भीख मांगने की इस पहल में दर्जनों कर्मचारी शामिल हुए। इनमंऔ प्रमुख नाम हैं —
केएन भट्ट, समीर पांडे, सतीश कुमार, केके तिवारी, अशोक कुमार, सुनीता तिवारी, संध्या रतूड़ी, कमलेश, ब्रिजेश, शिखा, चंदन चौहान, दिनेश लखेड़ा, ताजबर सिंह, मनीष पंवार, छत्रपाल सिंह आदि।
इन कर्मचारियों ने प्रतीकात्मक रूप से कटोरे हाथ में लेकर आम जनता से ‘वेतन दिलाने में मदद’ की अपील की, जो हर किसी का ध्यान आकर्षित कर रही थी।
जनता और स्थानीय संगठनों से समर्थन की अपील
कर्मचारी संगठनों ने हरिद्वार की जनता और स्थानीय सामाजिक संगठनों से समर्थन की अपील की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ वेतन की लड़ाई नहीं, बल्कि कर्मचारी सम्मान और सामाजिक न्याय की लड़ाई है।