अल्मोड़ा: उत्तराखंड के हवालबाग ब्लॉक स्थित कनालबुंगा गांव की रहने वाली पार्वती बिष्ट ने अपनी ज़िंदगी की दिशा बदली। शिक्षिका के पद पर आठ साल तक काम करने के बाद, उन्होंने खेती के क्षेत्र में कदम रखा और आज वह मशरूम उत्पादन के जरिए न केवल अपनी आत्मनिर्भरता को साबित कर रही हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी रोजगार प्रदान कर रही हैं। पार्वती बिष्ट का यह कदम एक प्रेरणा है, जो यह दिखाता है कि अगर संकल्प और मेहनत हो, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है।
शिक्षिका से मशरूम उत्पादक बनने की यात्रा
पार्वती बिष्ट ने 8 वर्षों तक एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम किया था। लेकिन उनका मन हमेशा कुछ नया करने और गाँव में बदलाव लाने का था। साल 2018 में, उन्होंने खेती के क्षेत्र में कदम रखने का निर्णय लिया और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत मशरूम उत्पादन का 10 दिन का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण से उनके जीवन में एक नया मोड़ आया और उन्होंने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा।
पार्वती ने शुरुआत में 100 मशरूम बैग के साथ उत्पादन करना शुरू किया। और यह उनका पहला कदम ही सफल रहा। पहली बार में ही करीब 500 किलो मशरूम की पैदावार हुई। इसके बाद, उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से 20,000 रुपये का ऋण लिया और कृषि विभाग से बीज पर सब्सिडी प्राप्त की। इस प्रकार, मशरूम उत्पादन की नींव रखी और देखते ही देखते उनका व्यवसाय सफल होने लगा।
मशरूम उत्पादन और महिला सशक्तिकरण
पार्वती बिष्ट मुख्य रूप से ढींगरी और बटन मशरूम की खेती करती हैं, जिसमें बटन मशरूम की मांग सबसे अधिक है। उनका कहना है कि मशरूम की खेती से उन्हें सालाना 3 लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। पार्वती ने अपने निजी खर्चे से मशरूम उत्पादन के लिए एक छोटा प्लांट भी स्थापित किया है, जो उन्हें अधिक उत्पादन करने में मदद करता है।
सिर्फ खुद की आमदनी ही नहीं, पार्वती बिष्ट ने आसपास के 8-10 महिलाओं को रोजगार भी प्रदान किया है। अब ये महिलाएं उनके साथ मिलकर मशरूम उत्पादन में भाग ले रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। पार्वती का कहना है, “महिलाओं को रोजगार देने से न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि यह पूरे समुदाय को सशक्त बनाता है।”
स्थानीय सप्लाई और होम डिलीवरी की योजना
पार्वती बिष्ट की मेहनत ने उन्हें एक नया मुकाम दिया है। अब वह अपने उत्पादों की सप्लाई अल्मोड़ा जिले के विभिन्न दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कर रही हैं। शुरुआत में ही मशरूम की अच्छी मांग आई, जो लगातार बढ़ रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मशरूम की बढ़ती मांग को देखते हुए, पार्वती ने भविष्य में होम डिलीवरी शुरू करने की योजना बनाई है।
पार्वती ने बताया कि बाजार में मशरूम की कीमत 400 रुपये प्रति किलो तक है, लेकिन वह इसे 250 से 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रही हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है, बल्कि उनका व्यवसाय भी तेजी से बढ़ रहा है।
आगे की योजना और सपना
पार्वती बिष्ट का सपना केवल मशरूम उत्पादन तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य है कि वह और अधिक महिलाओं को इस क्षेत्र से जोड़ें और उन्हें स्वरोजगार की दिशा में प्रोत्साहित करें। वह चाहती हैं कि यह मॉडल और आगे बढ़े ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवारों का आर्थिक विकास कर सकें।
इसके अलावा, पार्वती की योजना है कि वह अपनी उत्पादन क्षमता को और बढ़ाए, ताकि ज्यादा मशरूम बाजार में उपलब्ध हो सके और अधिक उपभोक्ताओं तक पहुँचे। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में वह अपनी सफलता की कहानी और भी लोगों तक पहुँचा सकेंगी और ज्यादा महिलाएं उनके साथ जुड़कर इस उद्योग को और विस्तार दे सकेंगी।
निष्कर्ष
पार्वती बिष्ट का कहानी एक प्रेरणा है, जो यह दिखाती है कि अगर किसी में कुछ करने का जज़्बा हो, तो किसी भी पेशेवर क्षेत्र में सफलता पाई जा सकती है। शिक्षिका से मशरूम उत्पादक बनने की उनकी यात्रा यह साबित करती है कि हर व्यक्ति में बदलाव लाने की शक्ति होती है। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक प्रेरणा है। उनकी तरह अगर और महिलाएं भी अपना कदम उठा सकें तो यह हमारे समाज को और भी सशक्त बना सकता है।
